Wednesday, September 23, 2009

खेल मुहब्बत का है जारी

कैसे बीती रात न पूछो
बिगड़े क्यों हालात न पूछो

दिल की दिल में ही रहने दो
दिल से दिल की बात न पूछो

ज्ञान ध्यान की सुन लो बातें
जोगी की तुम जात न पूछो

देखा तुमको दिल बौराया
भड़के क्यों जज़बात न पूछो

खेल मुहब्बत का है जारी
किस की होगी मात, न पूछो

प्रेम-नगर में 'श्याम सखा’ जी
क्या पायी सौगात, न पूछो

--श्याम सखा


Source : http://gazalkbahane.blogspot.com/2009/09/blog-post.html

2 comments:

  1. Hmmm poochh taachh me maza kyu kharaab karna...wo kaha bhi h na kisi ne...agar kuchh munh se kehta hu, maza nazron ka jaataa h...agar khamosh rehta hu,kaleja munh ko aata h...bhai wah!!!

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