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Wednesday, May 12, 2021
ना नीम ना हकीम, ना किसी आलिम से हल होंगे
ना नीम, ना हकीम, ना किसी आलिम से हल होंगे
ये तो मेरे दिल के मसले हैं, उसी ज़ालिम से हल होंगे
--अज्ञात
Saturday, May 8, 2021
जैसे चराग हो हवाओं के सामने
मेरी वफाएं हैं उनकी वफाओं के सामने
जैसे चराग हो हवाओं के सामने
गर्दिशें तो चाहती हैं मेरी तबाही मगर
चुप है वो किसी की दुआओं के सामनेे
--अज्ञात
Friday, April 30, 2021
Prescription है पर दवा नहीं है
कोई किस्त है जो अदा नहीं है
साँस बाकी है और हवा नहीं है
नसीहतें, सलाहें, हिदायतें तमाम
प्रिस्क्रिप्शन हैं पर दवा नहीं है
आँख भी ढक लीजिये संग मुँह के
मंजर सचमुच अच्छा नहीं है
हरेक शामिल है इस गुनाह में
कुसूर किसका है पता नहीं है।
Tuesday, February 23, 2021
दुख हमको अगर अपना बताना नहीं आता
दुख हमको अगर अपना बताना नहीं आता
तुमको भी तो अंदाज़ा लगाना नहीं आता
अज्ञात
अब सबके बाद आते हो
मतलब ये के भूला नहीं हूं
ये भी नहीं के याद आते हो
पहले सबसे पहले आते थे तुम
अब सबके बाद आते हो ।
अज्ञात
Sunday, February 14, 2021
मेरी तलब के तकाजे पर थोड़ा गौर तो कर
मेरी तलब के तकाजे पर थोड़ा गौर तो कर
मैं तेरे पास आया हूं, खुदा के होते हुए
-- अज्ञात
Sunday, January 31, 2021
आगे मुकद्दर आपका है
जलते घर को देखने वालों
भूस का छप्पर आपका है
आग के पीछे तेज़ हवा
आगे मुकद्दर आपका है
उसके क़त्ल पर मैं भी चुप था
मेरी बारी अब आई
मेरे क़त्ल पर आप भी चुप हो
अगला नंबर आपका है
नवाज़ देवबंदी
Monday, June 15, 2020
तुझे मेरी ज़रूरत है, मुझे तेरी ज़रूरत है
कोई पत्थर की मूरत है, किसी पत्थर में मूरत है,
लो हमने देख ली दुनिया, जो इतनी खूबसूरत है,
ज़माना अपनी समझे पर मुझे अपनी खबर ये है,
तुझे मेरी ज़रूरत है, मुझे तेरी ज़रूरत है
अज्ञात
Saturday, June 6, 2020
पनाहों में जो आया हो फिर उस पर वार क्या करना
पनाहो में जो आया हो फिर उसपर वार क्या करना
जो दिल हारा हो उसप फिर अधिकार क्या करना
मोहब्बत का मज़ा तो डूबने की कशमकश में है
हो मालूम गहराई तो दरिया पार क्या करना
Source: tiktok @praveenvarvariya01
Saturday, December 14, 2019
समझने लगे वो हमें खास यूं ही
बड़ा खुशनुमा है ये एहसास यूं ही
वो आने लगे हैं ज़रा पास यूं ही
ये हर बात पे मशवरा क्यों है गोया
समझने लगे वो हमें खास यूं ही
यूं गैरों से मिलना न मसला बड़ा है
मगर चुभ रही है ये इक फांस यूं ही
है हिजरत की बातें न जाने ये कैसी
उखड़ने लगी है मेरी सांस यूं ही
समझ लें इशारे वो ख़ुद इस ग़ज़ल में
लगाए हुए है ये दिल आस यूं ही
आशीष प्रकाश
Saturday, November 16, 2019
नादानी और तजुर्बे का बटवारा हो रहा है
हलके हलके बढ रही है चेहरे की लकीरें..
नादानी और तजुर्बे का बटवारा हो रहा है..!!
Thursday, October 24, 2019
Saturday, October 5, 2019
Tuesday, September 17, 2019
रोज़ रोज़ जलते हैं, फिर भी ख़ाक ना हुए
रोज़ रोज़ जलते हैं, फिर भी खाक़ न हुए,
अजीब हैं कुछ ख़्वाब भी मेरे, बुझ कर भी राख़ न हुए
--अज्ञात
Saturday, July 27, 2019
मैं प्यार के सरोवर में आग लिख रहा हूँ।
प्राणों में ताप भर दे वो राग लिख रहा हूँ
मैं प्यार के सरोवर में आग लिख रहा हूँ।
मेरी जो बेबसी है, उस बेबसी को समझो
उजडे़ हुए चमन को मैं बाग लिख रहा हूँ।
दामन पे मेरे जाने कितने लहू के छींटे
धोया न जा सके जो वो दाग लिख रहा हूँ।
दुनिया है मेरी कितनी ये तो नहीं पता, पर
धरती है मेरी जितनी वो भाग लिख रहा हूँ।
कितने अमीर होंगे दस बीस फ़ीसदी बस
कमज़ोर आदमी का मैं त्याग लिख रहा हूँ।
सब लोग मैल अपनी मल-मल के धो रहे हैं
असहाय साबुनों का मैं झाग लिख रहा हूँ
- डी. एम. मिश्र
🙏🌹🙏......
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