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Tuesday, November 15, 2011

तेरी सूरत से नहीं मिलती किसी की सूरत

तेरी सूरत से नहीं मिलती किसी की सूरत
हम जहाँ में तेरी तस्वीर लिए फिरते हैं

--हसरत जयपुरी

Source : http://lyricsindia.net/songs/show/6530

Thursday, October 6, 2011

वादा हैं..मेरा.. कि.. मैं नहीं हारूँगा...

माना वक़्त नहीं.. और.. बाकी कई काम सही...
राह भी हैं.. लम्बी.. और.. ढलती ये शाम सही...
अंजाम से पहले ..खुद को.. ना ..नकारुंगा..
वादा हैं..मेरा.. कि.. मैं नहीं हारूँगा...

जीत के बनेंगी पायदान..चट्टानें मुश्किलों की ..
हिम्मतो से बदलूँगा..लकीरे इन हथेलियों की...
कि हस्ती.. अब अपनी..हर कीमत सवारूँगा
वादा हैं.. मेरा.. कि .. मैं नहीं हारूँगा...

चाहए कितनी ही स्याह.. मायूसी नजर आती हो...
हौसलों कि चांदनी चाहे.. मद्धम हुई जाती हो...
कर मजबूत खुद को.. वक़्त-ऐ-मुफलिसी गुजारूँगा...
वादा हैं .. मेरा.. कि.. मैं नहीं हारूँगा...

आफताब नहीं तो क्या..ऑंखें उम्मीद से रोशन हैं..
ज़माने को नहीं.. तो क्या.. मुझे भरोसा हरदम हैं...
पाउँगा मंजिल ख्वाबो की.. चाँद जमी उतारूंगा...
वादा हैं .. मेरा.. कि.. मैं नहीं हारूँगा...

हार हो या जीत..मेरी हस्ती कोई फर्क ना आ जायेगा
कि 'आलोक' हर हाल यार.. शख्स वही रह जाएगा...
इन फिजूल पैमाइशो पर अब.. खुद को ना उतारूंगा...
वादा हैं .. मेरा.. कि.. मैं नहीं हारूँगा...

आलोक मेहता..

Sunday, June 12, 2011

मेरे दुश्मन तू मेरी दोस्ती को तरसे

मेरे दुश्मन तू मेरी दोस्ती को तरसे
मुझे ग़म देने वाले तू खुशी को तरसे

तू फूल बने पतझड़ का, तुझ पे बहार न आए कभी
मेरी ही तरह तू तड़पे तुझको क़रार न आए कभी
जिये तू इस तरह के ज़िंदगी को तरसे

इतना तो असर कर जाएं मेरी वफ़ाएं ओ बेवफ़ा
जब तुझे याद आएं अपनी जफ़ाएं ओ बेवफ़ा
पशेमां होके रोए, तू हंसी को तरसे

तेरे गुलशन से ज़्यादा, वीरान कोई वीराना न हो
इस दुनिया में कोई तेरा, अपना तो क्या, बेगाना न हो
किसी का प्यार क्या तू, बेरुख़ी को तरसे

--आनंद बख्शी

Sunday, June 5, 2011

हमें भूल जाना क़सम दे रहे हैं

बड़ी बेबसी है जो गम दे रहे हैं
हमें भूल जाना क़सम दे रहे हैं

जो दिल में कभी थी, उसी आरज़ू का
मोहब्बत से हो की उसी गुफ्तगू का
तुम्हे वास्ता हम सनम दे रहे हैं
हमें भूल जाना कसम दे रहे हैं

पलक पे रखेंगे तुम्हे सोचते थे,
कभी गम न देंगे तुम्हे, सोचते थे
मगर देखो आज सितम दे रहे हैं
हमें भूल जाना कसम दे रहे हैं

तुम्हारी नज़र से हँसे हर नज़ारे
क़दम दर क़दम हर खुशी हो तुम्हारे
दुआ जाते जाते, ये हम दे रहे हैं
हमें भूल जाना क़सम दे रहे हैं

हमें बेखुदी ने किया आज गाफिल
नहीं हैं तुम्हारी मोहब्बत के काबिल
इशारा बहकते क़दम दे रहे हैं
हमें भूल जाना क़सम दे रहे हैं

--जिगर शियोपुरी

Sunday, May 1, 2011

गुलज़ार साहब कहते है न....

गुलज़ार साहब कहते है न....

काश तुम्हारे जाने पर
कुछ फर्क तो पड़ता जीने में
प्यास न लगती पानी की या ,नाखून बढ़ना बंद हो जाते
बाल हवा में न उड़ते या धुंआ निकलता सांसो से
सब कुछ वैसे ही चलता है ...
बस इतना फर्क पड़ा है मेरी रातो में
नींद नहीं आती तो अब सोने के लिए
इक नींद की गोली रोज़ निगलनी पड़ती है !

love is always beautiful......

Saturday, November 20, 2010

तेरी दुनिया से होके मजबूर चला ...फ़िल्म : पवित्र पापी

तेरी दुनिया से हो के मजबूर चला
मैं बहुत दूर, बहुत दूर, बहुत दूर चला
तेरी दुनिया से ...

इस क़दर दूर हूँ मैं लौट के भी आ न सकूँ
ऐसी मंज़िल कि जहाँ खुद को भी मैं पा न सकूँ
और मजबूरी है क्या, इतना भी बतला न सकूँ
तेरी दुनिया से ...

आँख भर आयी अगर, अश्क़ों को मैं पी लूँगा
आह निकली जो कभी, होंठों को मैं सी लूँगा
तुझसे वादा है किया, इस लिये मैं जी लूँगा
तेरी दुनिया से ...

खुश रहे तू है जहां ले जा दुआएं मेरी
तेरी राहों से जुदा हो गयी राहें मेरी
कुछ नहीं साथ मेरे, बस हैं खताएं मेरी
तेरी दुनिया से ..

Saturday, July 31, 2010

दिल की ये आरज़ू थी कोई दिलरुबा मिले

दिल की ये आरज़ू थी कोई दिलरुबा मिले
लो बन गया नसीब के तुम हम से आ मिले
दिल की ये ...

देखें हमें नसीब से अब, अपने क्या मिले
अब तक तो जो भी दोस्त मिले, बेवफ़ा मिले

आँखों को इक इशारे की ज़ेहमत तो दीजिये
कदमों में दिल बिछा दूँ इजाज़त तो दीजिये
ग़म को गले लगा लूँ जो ग़म आप का मिले
दिल की ये ...

हम ने उदासियों में गुज़ारी है ज़िन्दगी
लगता है डर फ़रेब-ए-वफ़ा से कभी कभी
ऐसा न हो कि ज़ख़्म कोई फिर नया मिले
अब तक तो जो भी दोस्त मिले बेवफ़ा मिले

कल तुम जुदा हुए थे जहाँ साथ छोड़ कर
हम आज तक खड़े हैं उसी दिल के मोड़ पर
हम को इस इन्तज़ार का कुछ तो सिला मिले
दिल की ये ...

देखें हमें नसीब से अब, अपने क्या मिले
अब तक तो जो भी दोस्त मिले, बेवफ़ा मिले

* Movie: Nikaah
* Singer(s): Mahendra Kapoor, Salma Agha
* Music Director: Ravi
* Lyricist: Hasan Kamaal
* Actors/Actresses: Raj Babbar, Deepak Parashar, Salma Agha
* Year/Decade: 1982, 1980s


Source : http://chitrageet.blogspot.com/2010/05/blog-post_31.html

तुम अगर साथ देने का वादा करो

तुम अगर साथ देने का वादा करो
मैं यूँही मस्त नग़मे लुटाता रहूं
तुम मुझे देखकर मुस्कुराती रहो
मैन तुम्हें देखकर गीत गाता रहूँ, तुम अगर...

कितने जलवे फ़िज़ाओं में बिखरे मगर
मैने अबतक किसी को पुकरा नहीं
तुमको देखा तो नज़रें ये कहने लगीं
हमको चेहरे से हटना गवारा नहीं
तुम अगर मेरी नज़रों के आगे रहो
मैन हर एक शह से नज़रें चुराता रहूँ, तुम अगर...

मैने ख़्वाबों में बरसों तराशा जिसे
तुम वही संग-ए-मरमर की तस्वीर हो
तुम न समझो तुम्हारा मुक़द्दर हूँ मैं
मैं समझता हूं तुम मेरी तक़दीर हो
तुम अगर मुझको अपना समझने लगो
मैं बहारों की महफ़िल सजाता रहूं, तुम अगर...

मैं अकेला बहुत देर चलता रहा
अब सफ़र ज़िन्दगानी का कटता नहीं
जब तलक कोई रंगीं सहारा ना हो
वक़्त क़ाफ़िर जवानी का कटता नहीं
तुम अगर हमक़दम बनके चलती रहो
मैं ज़मीं पर सितारे बिछाता रहूं

तुम अगर साथ देने का वादा करो ...

Source : http://chitrageet.blogspot.com/2008/11/blog-post_788.html
* फ़िल्म - हमराज़ (१९६७) *
* गायक - महेंद्र कपूर *
* संगीतकार - रवि *
* गीतकार - साहिर लुधियानवी *


Tuesday, July 27, 2010

ए काश कहीं ऐसा होता

ए काश कहीं ऐसा होता, के दो दिल होते सीने में
इक टूट भी जाता इश्क़ में तो, तकलीफ़ ना होती जीने में

ए काश कहीं ऐसा होता, के दो दिल होते सीने में

सच कहते है लोग के पीकर, रंग नशा बन जाता है
कोई भी हो, रोग यह दिल का, दर्द दवा बन जाता है

आग लगी हो इस दिल में तो, हर्ज़ है क्या फिर पीने में

ए काश कहीं ऐसा होता, के दो दिल होते सीने में
इक टूट भी जाता इश्क़ में तो, तकलीफ़ ना होती जीने में

ए काश कहीं ऐसा होता, के दो दिल होते सीने में

भूल नहीं सकता यह सदमा, याद हमेशा आएगा
किसी ने ऐसा दर्द दिया तो, बरसो मुझे तड़पाएगा
भर नहीं सकते ज़ख़्म यह दिल के, कोई साल महीने में

ए काश कहीं ऐसा होता, के दो दिल होते सीने में
एक टूट भी जाता इश्क़ में तो, तकलीफ़ ना होती जीने में

ए काश कहीं ऐसा होता, के दो दिल होते सीने में

--अज्ञात

Tuesday, July 20, 2010

ये मेरी मोहब्बत की तौहीन होगी

तेरी बेवफाई का शिकवा करूँ तो
ये मेरी मोहब्बत की तौहीन होगी

भरी बज़्म में तुझको रुसवा करूँ तो
ये मेरी शराफत की तौहीन होगी
तेरी बेवफाई का शिकवा करू तो
ये मेरी मोहब्बत की तौहीन होगी

न महफ़िल में होंगी, न मेले में होंगी
ये आपस की बातें अकेले में होंगी
मैं लोगो से तेरी शिकायत करूँ तो
ये मेरी शिकायत की तौहीन होंगी

तेरी बेवफाई का शिकवा करू तो
ये मेरी मोहब्बत की तौहीन होगी

सुना है तेरा और भी इक बलम है
मगर गम न कर तुझको मेरी कसम है
तुझे बेशरम बेमुरव्वत कहूँ तो
ये मेरी मुरव्वत की तौहीन होगी

तेरी बेवफाई का शिकवा करू तो
ये मेरी मोहब्बत की तौहीन होगी

--शहजाद साहिब

Friday, March 5, 2010

गम नहीं शिकवा नहीं, अफ़सोस में दिल रोया है

हमारे एक और दोस्त, इफ्त ने भी शायरी का शौक पाला है, सो उनका एक गीत आपकी नज़र कर रहा हूँ
ज़रा गौर फरमाइयेगा


गम नहीं, शिकवा नहीं, अफ़सोस मे दिल रोया है,
कितना बदनसीब है वो, पाकर हमे खोया है |

उसके लिए दुनिया की दलीलों को झुटा देते,
हम ऐब भी उसके तमगो से सजा देते,
फिर दिल क्यों न उसे देते खेलने के वास्ते,
हमने फरेब भी जिसका, गज़लों में संजोया है |
कितना बदनसीब है वो, पाकर हमे खोया है |

वो खेल ज़माने भर के मेरे दिल के साथ करता,
नफरत भरी नज़र से मुस्कुरा के बात करता,
दर्द मेरे ज़ज्बात का वो कैसे समझता भला,
चाहत को जिसने नफरत के, धागों से पिरोया है |
कितना बदनसीब है वो, पाकर हमे खोया है |

हम जिनके ख्यालो में दिन रात हुए थे गुम
कहते है हमको ज्यादा सोचा न करो तुम,
उल्फत में किसी की जगना "इफ्त" वो क्या जाने,
बेफिक्र होके हर रात जो, आराम से सोया है|
कितना बदनसीब है वो, पाकर हमे खोया है |

--इफ्त

Sunday, October 11, 2009

ਆਜ ਦਿਨ ਹਸ਼ਰ ਦਾ, ਕਲ ਮੈਂ ਨਹੀਂ ਰੈਣਾ

ਆਜ ਦਿਨ ਹਸ਼ਰ ਦਾ, ਕਲ ਮੈਂ ਨਹੀਂ ਰੈਣਾ
ਜੇ ਲਾਈ ਯਾਰੀ ਮੁਲ ਮੋੜਨਾ ਪੈਣਾ
ਤੂ ਅਗ੍ਗੇ ਵਧਯਾ ਤੈਨੂਂ ਫਰਕ ਨਹੀਂ ਪੈਣਾ,
ਮੈਂ ਪਿਛੇ ਹਟ ਗਯਾ ਮੇਰਾ ਕਖ ਨਹੀਂ ਰੈਣਾ

ਆਜ ਦਿਨ ਹਸ਼ਰ ਦਾ, ਕਲ ਮੈਂ ਨਹੀਂ ਰੈਣਾ
ਜੇ ਲਾਈ ਯਾਰੀ ਮੁਲ ਮੋੜਨਾ ਪੈਣਾ


--Babbu maan

Full song available http://www.youtube.com/watch?v=ptDEztK4MIU&feature=related

Wednesday, May 13, 2009

ਕੋਈ ਤਾ ਪੈਗਾਮ ਲਿਖੇ

ਕੋਈ ਤਾ ਪੈਗਾਮ ਲਿਖੇ
ਕਦੇ ਮੇਰੇ ਨਾਮ ਲਿਖੇ
ਕੋਈ ਤਾ ਪੈਗਾਮ ਲਿਖੇ
ਕਦੇ ਮੇਰੇ ਨਾਮ ਲਿਖੇ

ਕਿਂਜ ਲਗਦਾ ਮੇਰੇ ਬਿਨ ਰੇਹਣਾ ਓਹਸਨੁ

ਜੇ ਮਿਲੇ ਓਹ ਕੁੜੀ
ਮਿਲੇ ਓਹ ਕੁੜੀ ਤਾ ਕਦੇ ਕੇਹਣਾ ਓਹਸਨੁ
ਜੇ ਮਿਲੇ ਓਹ ਕੁੜੀ

ਕੋਈ ਤਾ ਪੈਗਾਮ ਲਿਖੇ
ਕਦੇ ਮੇਰੇ ਨਾਮ ਲਿਖੇ

ਮੈ ਤਾ ਓਹਦੇ ਮਥੇ ਓਤੇ ਚਂਦ ਧਰ ਦਿਂਦਾ ਸੀ
ਤੋਰ ਤੋਰ ਤਾਰੇ ਓਹਦੀ ਮਾਂਗ ਭਰ ਦਿਂਦਾ ਸੀ
ਮੈ ਤਾ ਓਹਦੇ ਮਥੇ ਓਤੇ ਚਂਦ ਧਰ ਦਿਂਦਾ ਸੀ
ਤੋਰ ਤੋਰ ਤਾਰੇ ਓਹਦੀ ਮਾਂਗ ਭਰ ਦਿਂਦਾ ਸੀ

ਫੇਰ ਦਿਤ੍ਤਾ ਕਿਸੇ ਇਹੋ ਜੇਹਾ ਗੇਹਣਾ ਓਹਸਨੁ


ਜੇ ਮਿਲੇ ਓਹ ਕੁੜੀ
ਮਿਲੇ ਓਹ ਕੁੜੀ ਤਾ ਕਦੇ ਕੇਹਣਾ ਓਹਸਨੁ
ਜੇ ਮਿਲੇ ਓਹ ਕੁੜੀ

ਕੋਈ ਤਾ ਪੈਗਾਮ ਲਿਖੇ
ਕਦੇ ਮੇਰੇ ਨਾਮ ਲਿਖੇ

ਮੇਰੇ ਲਗ੍ਗੀ ਸਾਟ੍ਟ੍ ਵੇਖ ਤਾਹੀ ਰੋਹ ਪੈਂਦੀ ਸੀ
ਅਪਣੇ ਵੀ ਓਹਸੇ ਥਾਂ ਤੇ ਪਟ੍ਟੀ ਬਨ੍ਨ ਲੈਂਦੀ ਸੀ
ਮੇਰੇ ਲਗ੍ਗੀ ਸਾਟ੍ਟ੍ ਵੇਖ ਤਾਹੀ ਰੋਹ ਪੈਂਦੀ ਸੀ
ਅਪਣੇ ਵੀ ਓਹਸੇ ਥਾਂ ਤੇ ਪਟ੍ਟੀ ਬਨ੍ਨ ਲੈਂਦੀ ਸੀ

ਹੁਣ ਆ ਗਯਾ ਕੇ ਨਹੀ ਦੁਖ ਸੇਹਣਾ ਓਹਸਨੁ

ਜੇ ਮਿਲੇ ਓਹ ਕੁੜੀ
ਮਿਲੇ ਓਹ ਕੁੜੀ ਤਾ ਕਦੇ ਕੇਹਣਾ ਓਹਸਨੁ
ਜੇ ਮਿਲੇ ਓਹ ਕੁੜੀ

ਕੋਈ ਤਾ ਪੈਗਾਮ ਲਿਖੇ
ਕਦੇ ਮੇਰੇ ਨਾਮ ਲਿਖੇ

--ਅਮਰਿਂਦਰ ਗਿਲ੍ਲ