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Monday, October 12, 2009

यूं तो फूल से रंगत न गयी, बू न गयी

यूं तो किस फूल से रंगत न गयी, बू न गयी
ए मोहब्बत मेरे पहलू से मगर तू न गयी
--अख्तर शिरानी


इसी गज़ल का दूसरा शेर

Saturday, April 4, 2009

मिट चले मेरी उम्मीदों के हर्फ़ मगर

मिट चले मेरी उम्मीदों के हर्फ़ मगर
आज तक तेरे खतों से तेरी खुश्बू न गयी
--अख्तर शिरानी