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Friday, May 8, 2009

अजीब है कि मुझे रास्ता नहीं देता

अजीब है कि मुझे रास्ता नहीं देता
मैं उसको राह से जब तक हटा नहीं देता

मुझे भी चाहिये कुछ वक्त खुद से मिलने को
मैं हर किसी को तो अपना पता नहीं देता

ये अपनी मर्ज़ी से अपनी जगह बनाते हैं
समंदरों को कोई रास्ता नहीं देता

ज़रूर है किसी गर्दन पे रौशनी का खून
कोई चिराग तो खुद को बुझा नहीं देता

मेरी निगाह की गुस्ताखियाँ समझता है
वो जाने क्यों मुझे फ़िर भी सज़ा नहीं देता

ये छोटे छोटे दिये साज़िशों में रहते हैं
किसी का घर, कोई सूरज जला नहीं देता

--वसीम बरेलवी

Monday, April 27, 2009

अगर वो आसमानों में बुलाये तो चले जाना

अगर वो आसमानों में बुलाये तो चले जाना
मोहब्बत करने वाले फासले देखा नहीँ करते
--वसीम बरेलवी

Sunday, March 29, 2009

सलीका ही नहीं उसे महसूस करने का

सलीका ही नहीं उसे महसूस करने का
जो कहता है, खुदा है तो नज़र आना ज़रूरी है
--वसीम बरेलवी

Saturday, March 28, 2009

बहुत बेबाक आंखों में तालुक टिक नहीं पाता

बहुत बेबाक आंखों में तालुक टिक नहीं पाता
मोहब्बत में कशिश के लिये शर्माना ज़रूरी है
--वसीम बरेलवी

जा हमेशा के लिये मुझे छोड़ कर जाने वाले

जा हमेशा के लिये मुझे छोड़ कर जाने वाले
तुझसे हर लम्हा बिछड़ने का डर तो खत्म हुआ
--वसीम बरेलवी