नज़र उठाओ ज़रा तुम तो क़ायनात चले,
है इन्तज़ार कि आँखों से कोई बात चले
तुम्हारी मर्ज़ी बिना वक़्त भी अपाहज है
न दिन खिसकता है आगे, न आगे रात चले
न जाने उँगली छुड़ा के निकल गया है किधर
बहुत कहा था जमाने से साथ साथ चले
किसी भिखारी का टूटा हुआ कटोरा है
गले में डाले उसे आसमाँ पे रात चले
--गुलज़ार
Audio : http://tanhayi.mywebdunia.com/2008/11/11/1226401126621.html
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Saturday, November 19, 2011
नज़र उठाओ ज़रा तुम तो क़ायनात चले
Sunday, May 1, 2011
गुलज़ार साहब कहते है न....
गुलज़ार साहब कहते है न....
काश तुम्हारे जाने पर
कुछ फर्क तो पड़ता जीने में
प्यास न लगती पानी की या ,नाखून बढ़ना बंद हो जाते
बाल हवा में न उड़ते या धुंआ निकलता सांसो से
सब कुछ वैसे ही चलता है ...
बस इतना फर्क पड़ा है मेरी रातो में
नींद नहीं आती तो अब सोने के लिए
इक नींद की गोली रोज़ निगलनी पड़ती है !
love is always beautiful......
Sunday, March 29, 2009
बिक जायें बाज़ार में हम भी, लेकिन उस से क्या होगा
बिक जायें बाज़ार में हम भी, लेकिन उस से क्या होगा
जिस कीमत पर तुम मिलते हो, उतने कहाँ है अपने दाम
--ग़ुलज़ार
जिस कीमत पर तुम मिलते हो, उतने कहाँ है अपने दाम
--ग़ुलज़ार
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