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Wednesday, February 3, 2010

परखता हूँ मैं जब ये बात बुनियादी निकलती है,

परखता हूँ मैं जब ये बात बुनियादी निकलती है,
कोई सूरत हो माँ के सामने सादी निकलती है !!

शहीदों को भूलाते जा रहे हो, याद रख लेना ,
कि उनके खून से हो कर ही आज़ादी निकलती है !!

वहां लाकर मुझे इस वक़्त ने छोडा है जहाँ से ,
मैं सारी उम्र भी चलता हूँ तो आधी निकलती है,

(और इक शेर जिन दोस्तों ने रामायण पढ़ी या देखी हो उसमे एक अहील्या का किस्सा आता है जब राम जी के पैर छूते ही पत्थर अहिल्या राजकुमारी बन गया थी !!)


कहाँ है राम वो हम ने सुना है जिन के पांव से ,
लगी ठोकर तो फिर पत्थर से शहज़ादी निकलती है !!

भरी दोपहर में 'रीताज़' ऐसे याद आते हो ,
के जैसे छोड़ कर शहरों को आबादी निकलती है !!

--रीताज मैनी

शहीदों को भूलाते जा रहे हो, याद रख लेना

शहीदों को भूलाते जा रहे हो, याद रख लेना
कि उनके खून से हो कर ही आज़ादी निकलती है !!

--रीताज मैनी

परखता हूँ मैं जब ये बात बुनियादी निकलती है

परखता हूँ मैं जब ये बात बुनियादी निकलती है,
कोई सूरत हो माँ के सामने सादी निकलती है !!

--रीताज मैनी

Wednesday, January 27, 2010

तुझे पढ़ता हूँ मैं हर बार, शायद

तुझे पढ़ता हूँ मैं हर बार, शायद
बदल जाये तेरा किरदार , शायद !!

मेरा दुश्मन गले से लग के रोए ,
अगर मैं छोड़ दूँ तलवार , शायद !!

उसे भी जिद पड़ी है जीतने की ,
उसे भी तोड़ दे इक हार , शायद !!

के अब चुल्लू बचा है, डूबने को ,
समंदर कर गया इनकार, शायद !!

वो कुछ लिखने को कागज़ ढूंढता था ,
उसे भी हो गया है प्यार , शायद !!

खिलोने बाँट कर खेलो न बच्चो,
यहीं से उठती है दीवार शायद !!

--रीताज़ मैनी

Sunday, January 10, 2010

बही लिखता हुआ सब रेज़गारी पूछ लेता है

बही लिखता हुआ सब रेज़गारी पूछ लेता है ,
वो नकदी लहजे से मेरी उधारी पूछ लेता है ,

बिना ताली के सब गाली बजा कर लौट पड़ते हैं
जो अपने खेल का पैसा मदारी पूछ लेता है

उठा कर बीन इस डर से कभी जंगल नहीं जाता
मैं पकडूं सांप कैसे वो पिटारी पूछ लेता है

तेरे इज़हार पर हैरान: है 'रिताज़' वो ऐसे
के जैसे मोल गहने का भिखारी पूछ लेता है

--रिताज़ मैनी

Wednesday, January 6, 2010

झूठे थे…

हमारे गम में जो भी थे उदास , झूठे थे ,
वो लोग जितने थे सब आस पास, झूठे थे !!

तेरे लबों को मेरे होंठ कैसे छू पाते,
के प्यास सच्ची थी लेकिन, गिलास, झूठे थे !!

शराब शौक थी उनका ! वो इश्क कहते रहे,
महोब्ब्तों में सभी देवदास, झूठे थे !!

तुम्हे 'रिताज़' खबर हो भी कैसे सकती थी ,
अमीर शहर के उजले लिबास झूठे थे !

--रिताज़ मैनी