ख्वाब बोये थे हिज्र काटा है
इस मोहब्बत में बहुत घाटा है
--सतलज राहत
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ये बात जो गर होती मेरे इख्तियार में
सदियाँ गुज़ार देता तेरे इंतज़ार में
--सतलज राहत
तुम्हारे रास्तो से दूर रहना ...
कहाँ तक ठीक है मजबूर रहना ..
सभी के बस की बात थोड़ी है ..
नशे में इस कदर भी चूर रहना ..
न जाने किस कदम पे छोड़ेगी ..
हमारे साथ रहके दूर रहना ...
तुम्हारी याद ही तो जानती है ..
मेरे कमरे बनके नूर रहना ...
सच तो ये है मेरी तमन्ना थी ..
तुम्हारी मांग का सिंदूर रहना ..
जो मेरे पास आना चाहती है ..
वो ही कहती है मुझसे दूर रहना ...
तो क्या ठीक है मेरे दिल में ...
तुम्हारा बनके यूं नासूर रहना ..
मुझसे पूछो के इतने पत्थरो में..
कितना मुश्किल है कोहिनूर रहना ..
उसकी आदत में आ गया है अब ...
हमारे नाम से मशहूर रहना ...
मैंने तो सिर्फ इतना जाना है ...
बड़ा मुश्किल है तुझसे दूर रहना ..
कभी इसा कभी सुखरात बनना ..
कभी सरमद कभी मंसूर रहना ..
ये शायरी नहीं तज्जली है ..
ज़हन ऐसे ही कोहेतूर रहना ..
'सतलज' हम तुझे पहचानते हैं ..
तुझे हक है युही मगरूर रहना .
--सतलज राहत
गमों में डूबे तो फिर जगमगा के निकले हैं ...
यहाँ डूबे थे ... बड़ी दूर जा के निकले हैं ....
तेरी बाहों में बड़े प्यार से आये थे मगर ..
तेरे पंजो से बहुत छटपटा के निकले हैं ...
तूने भी दिल को दुखने की इन्तहा कर दी...
हम भी महफ़िल से मगर मुस्कुरा के निकले हैं ..
कई लोगो से मेरी नौकरी की बात हुई ...
बहुत से काम तो हाथो में आ के निकले हैं ...
मेरे ही ज़ब्त ने बेचैन किया है तुझको ..
ये तेरे आंसू मुझे आजमा के निकले हैं ...
बड़े तैराक हैं ये मैंने खुद भी देखा है ...
यहाँ कूदे थे .. बहुत दूर जा के निकले हैं ..
धड़कने रुक गयी , दम भी निकल गया मेरा..
सभी अरमान तेरे पास आ के निकले हैं ..
हमने हर नौकरी बर्बाद होके छोड़ी है ...
सबको लगता है के पैसा कमा के निकले हैं ..
ऐसे वैसो को भी दिल में बसा लिया ''सतलज'
बहुत से लोग तो बातें बना के निकले हैं ...
देखना है ये नफरत और किस मकाम तक पहुंचे
गोधरा से चले थे हम अक्षरधाम तक पहुंचे
तुझको भूल जाऊ या तुझे अपना लूं मैं
कोशिश है ये अफसाना किसी अंजाम तक पहुंचे
--सतलज राहत
मेरे पीछे ये ज़माना पड़ जाये ..
जाने कब शहर से जाना पड़ जाये ..
तू किसी को भी अपना दिल दे दे ..
कही मुझको न चुराना पड़ जाये ..
छुड़ा के पीछा वो ये सोचती है
फिर से पीछे वो दीवाना पड़ जाये ..
आ भी जा के नया है इश्क मेरा ..
इससे पहले के पुराना पड़ जाये .
--सतलज राहत
प्यार का नश्शा , मोहब्बत की खुमारी देखे
जो भी देखे यहाँ .. मुझ पर तुझे तारी देखे
बस तेरे आरिज़_ओ_ रुखसार ही आते हैं नज़र
किसको फुर्सत जो यहाँ चोट हमारी देखे
मुझे भी शहर में छोटी सी सल्तनत दे दे
राह कब तक वो मेरी राजकुमारी देखे
--सतलज राहत
समंदर जैसा बेक़रार कर के छोड़ दिया..
इश्क में उसको गिरफ्तार कर के छोड़ दिया ..
मौत अब आ ही जा तू साथ दवाई लेकर ..
ज़िन्दगी ने मुझे बीमार कर के छोड़ दिया ...
नसीब ने भी अजब खेल दिखाया के हमे ...
हर एक शय का तलबगार कर के छोड़ दिया ...
उम्र गुजरेगी उसकी भी ग़लतफ़हमी में ...
हमने भी इश्क का इज़हार कर के छोड़ दिया ...
प्यार में सबको ही मैंने सबक सिखाया है ...
तुझे भी कितना समझदार कर के छोड़ दिया ...
वो तो गलियों में दीवानी सी फिरा करती थी...
मैंने बस थोडा सा सिंगार कर के छोड़ दिया..
हाँ सच है प्यार कई बार भी हो सकता है ...
"सतलज" तुने क्यों एक बार कर के छोड़ दिया..
--सतलज राहत
दिल में फिर जैसे ज़लज़ले आये ...
ख्याल तेरे यूं चले आये.. ...
हमने छोड़ा नहीं तेरा दामन ...
कितने मौसम बुरे भले आये..
गुज़ारिश हो रही है लम्हों से ...
कोई तो साथ तुझे ले आये ....
जिनकी नियत में बस मोहब्बत थी. ..
उनकी किस्मत में फासले आये...
हैरान रह गई सारी दुनिया ....
खुदा के ऐसे फैसले आये...
बिछड़ते वक़्त बस यही गम है ....
हम बहुत दूर तक चले आये ...
शाम होते ही मेरी आँखों में ...
कितनी यादो के काफिले आये..
"सतलज" तुमको बहुत रोका था...
तुम नहीं माने , तुम चले आये......
--सतलज राहत
कुछ साजिशों में ये मेरे दिमाग लग जाए
मेरे हाथो में जो तेरा सुहाग लग जाए
तेरी और मेरी ये दुनिया जो कहानी सुनले
तेरे इस पाकीज़ा आँचल पे दाग लग जाए
सफ़ेद बर्फ सा वो जो बदन दिखता है
मैं उसे छू लूं किसी दिन तो आग लग जाए
--सतलज रहत
अब इसका ज़िक्र भी सच्चाइयों में आता है
मेरा दुश्मन भी मेरे भाइयों में आता है
लब पे नाम तो बरसों तलक नहीं आता
तेरा ख़याल पर तनहाइयों में आता है
हम शिखर भी दंगाइयों का होते हैं
हमारा नाम भी दंगाइयों में आता है
कभी मैं उसको रोने से रोकता ही नहीं
मुझे सुकून ही गहराइयों में आता है
तुम्हारे साथ जो तनहाइयों में रहता है
वो मेरे पास भी तनहाइयों में आता है
मेरा मौसम सा बचपन जो खो गया थ कहीं
अभी वो सुबह की अंगडाईयों में आता है
वो अब सुनाई भी खामोशियों में देता है
वो अब दिखाई भी परछाइयों में आता है
सुना है उसकी आँखें भी भीग जाती हैं
'सतलज' याद जब तनहाइयों में आता है
--सतलज राहत
सादा लफ्ज़ कहाँ इतना सुरूर करता है
ये शायर कोई नशा तो ज़रूर करता है
मैं सूरज हूँ पर नज़र झुका के चलता हूँ
वो जुगनू है लेकिन गुरूर करता है
--सतलज राहत
बहुत बेचैन करती है, बहुत बेहाल करती है
किसी से chat करती है, किसी को कॉल करती है
--सतलज राहत
मेरी किस्मत की हथकड़ी हो न ?
तुम मेरे साथ हर घडी हो न ?
मैं सोच सोच के थक जाता हूँ
तुम मेरी सोच से बड़ी हो न ?
बहुत तड़पा हूँ तुम्हे पाने को
तुम भी तकदीर से लड़ी हो न ?
मुझे इस रास्ते में छोड़ के
तुम मेरी सोचो में चल पड़ी हो न ?
कहा करती थी भूल जाऊँगी
शाम होते ही रो पड़ी हो न ?
मैं तनहा किस तरह रह पाऊंगा
जिंदगी तुम बहुत बड़ी हो न ?
सफर में लुफ्त बहुत आएगा
ठोकरों राह में पड़ी हो न?
बुलंदियों, गुरूर था तुमको
मेरे पैरों में गिर पड़ी हो न ?
सतलज आज तक नहीं भूला
एक लड़की का फुलझड़ी होना
--सतलज रहत
हमारी बातो पे ईमान नहीं आएगा
तो तुझे इश्क का ये ज्ञान नहीं आएगा
अरे नादान मोहब्बत का इम्तेहान है ये
कोई सवाल अब आसान नहीं आएगा
मुझे खुद उठ के आसमान चूम लेना है
मेरी ज़मीन पे आसमान नहीं आएगा
है अब ये हाल के सोती नहीं वो रातो में
उसे लगा था मेरा ध्यान नहीं आएगा
आ ज़रा बैठ हम दो-चार घडी बात करे
इतनी जल्दी तो इत्मिनान नहीं आएगा
मुझे यकीन है मोहब्बत में जान भी दे दूं
तुझे यकीन मेरी जान नहीं आएगा
भटकता हू भरी बरसात में सूखा सूखा
अब भी मिलने, क्या बे-ईमान नहीं आएगा?
तू बस ये मान वो आएगा, तो वो आएगा
नहीं आएगा, तो ये मान नहीं आएगा
जो भी उलझन है तेरे दिल कि वो बता मुझको
झिझक रहेगी तो फिर ज्ञान नहीं आएगा
कई ठिकाने इसी शहर में पता है मुझे
कोई हमारे दरमियान नहीं आएगा
हिजरत कर गए सब ख्वाब मेरी आँखों से
के दिल में अब कोई अरमान नहीं आएगा
फिर उसी इश्क के पंजे में फंस गया 'सतलज'
कोई बचाने तेरी जान नहीं आएगा
--सतलज राहत
तेरे वादों मे जब तक दम रहेगा
ये मेरा हौंसला कायम रहेगा
तेरे अंदर वही हवा रहेगी
मेरे अंदर वही आदम रहेगा
ज़माना चाहतों का आ गया है
कई दिन तक यही मौसम रहेगा
तुझे महसूस ही करना है मुझको
तुझे लिखने लगूं तो कम रहेगा
सोच पथरा गई हैं सब की सब
तेरा ख्याल पर रेशम रहेगा
कुछ दिनों तो हुमारे साथ थीं तुम
बहुत दिन अब तुम्हारा गम रहेगा
मेरी पेशनी पे ये बल रहेगा
तुम्हारी ज़ुलफ मे ये ख़म रहेगा
कोई भी ज़ख़्म दे मुझे लेकिन
तुम्हारे पास ही मरहम रहेगा
ख्वाब आयेंगे पर बेजान हो कर
दिल भी धड़केगा पर बेदम रहेगा
मेरे बगैर तेरे शानो पर
जो भी आँचल रहेगा, नम रहेगा
रात अपनी पे उतर आई है
सवेरे हर तरफ मातम रहेगा
ये भी दिल तोड़ क जायेगी एक दिन
मुझे इस बात का भी गम रहेगा
बिछड़ के टूट-फूट जाऊंगा
तुझे अफ़सोस थोड़ा कम रहेगा
'सतलज' तेरी ही जयकार होगी
'सतलज' तेरा ही परचम रहेगा!!!
--सतलज राहत
दोस्त ये जो चीता-कशी का रास्ता है
ये शोहरत का नहीं है, ख़ुदकुशी का रास्ता है
जहाँ हम चलते हैं वहाँ सिर्फ हम ही चलते हैं
जहाँ तुम चलते हो, वो हर किसी का रास्ता है
--सतलज राहत
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फरेब दे दे इश्क़ मे मुझे पागल कर दे
एक अधूरी सी कहानी है मुकम्मल कर दे
नही औकात के सोचों को लफ़्ज़ों मे ढालूं
मेरे खुदा मेरे अहसास को ग़ज़ल कर दे
तू मेरे वास्ते बहाए तो अज़ीम खुदा
तेरी आँखो के हर आँसू को गंगाजल कर दे
उसी ने सोच के सब मुश्किले बनाई हैं
वो अगर चाहे तो सब मुश्किलो का हल कर दे
मैं जो भी चाहू ज़िंदगी मे उससे पा के रहूँ
मेरे खुदा मुझे इस बात पे अटल कर दे
यकीन रख वो हक़ीकत मे मुझको ढूँढेगी
उसके ख्वाबो मे ज़रा सा मेरा दखल कर दे
बात अच्छी है के हर बात मान जाता है
वो ज़िद पे आए तो हर बात मे खलल कर दे
'सतलज' ये पहली मुलाकात बहुत अच्छी थी
उसके होंठो की हर इक बात को ग़ज़ल कर दे
-सतलज राहत
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झूठी तोहमत लगाए जा रहा है
यही गम मुझको खाए जा रहा है
मुझे यादें जलाए जा रही हैं
मुझे बादल भीगाए जा रहा है
तेरे आने की कुछ उम्मीद नही
तेरा ख्याल आए जा रहा है
धूप मे ही करेगा याद मुझको
अभी वो साए साए जा रहा है
मुझसे कुछ ख़ैरियत भी पूछ मेरी
अपने किस्से सुनाए जा रहा है
मेरा ये है, के मैं वही पे हूँ
वक़्त का ये है, जाए जा रहा है
गहरा ज़ख़्म है कोई दिल मे
मुसलसल मुस्कुराए जा रहा है
इतने नखरे कहा उठाने थे
कितने नखरे उठाए जा रहा है
छुपाना याद नही है उसको
बड़ी बातें बनाए जा रहा है
वही तुझको बुलाना भूल गया
तो तू क्या बिन बुलाए जा रहा है
मेरी सोचो मे आने लग गया है
मेरी नींदें चुराए जा रहा है
मुझे बस तुझसे यही कहना है
ये कैसे दिन दिखाए जा रहा है
मैं कोई अपने काम आ ना सका
खुदा भी आज़माए जा रहा है
'सतलज' मार रहा है खुद को
अपना लिखा मिटाए जा रहा है!!!
--सतलज राहत
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