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Sunday, April 12, 2015

इस मोहब्बत में बहुत घाटा है

ख्वाब बोये थे हिज्र काटा है
इस मोहब्बत में बहुत घाटा है

--सतलज राहत

Friday, June 6, 2014

ये बात जो गर होती मेरे इख्तियार में

ये बात जो गर होती मेरे इख्तियार में
सदियाँ गुज़ार देता तेरे इंतज़ार में

--सतलज राहत

Tuesday, November 12, 2013

कहाँ तक ठीक है मजबूर रहना ..

तुम्हारे रास्तो से दूर रहना ...
कहाँ तक ठीक है मजबूर रहना ..

सभी के बस की बात थोड़ी है ..
नशे में इस कदर भी चूर रहना ..

न जाने किस कदम पे छोड़ेगी ..
हमारे साथ रहके दूर रहना ...

तुम्हारी याद ही तो जानती है ..
मेरे कमरे बनके नूर रहना ...

सच तो ये है मेरी तमन्ना थी ..
तुम्हारी मांग का सिंदूर रहना ..

जो मेरे पास आना चाहती है ..
वो ही कहती है मुझसे दूर रहना ...

तो क्या ठीक है मेरे दिल में ...
तुम्हारा बनके यूं नासूर रहना ..

मुझसे पूछो के इतने पत्थरो में..
कितना मुश्किल है कोहिनूर रहना ..

उसकी आदत में आ गया है अब ...
हमारे नाम से मशहूर रहना ...

मैंने तो सिर्फ इतना जाना है ...
बड़ा मुश्किल है तुझसे दूर रहना ..

कभी इसा कभी सुखरात बनना ..
कभी सरमद कभी मंसूर रहना ..

ये शायरी नहीं तज्जली है ..
ज़हन ऐसे ही कोहेतूर रहना ..

'सतलज' हम तुझे पहचानते हैं ..
तुझे हक है युही मगरूर रहना .

--सतलज राहत

Friday, April 19, 2013

मेरी किस्मत में तुझे पाना था

मेरी किस्मत में तुझे पाना था
मेरी किस्मत बदल गई साली
--सतलज राहत

Monday, March 25, 2013

ये तेरे आंसू मुझे आजमा के निकले हैं ...

गमों में डूबे तो फिर जगमगा के निकले हैं ...
यहाँ डूबे थे ... बड़ी दूर जा के निकले हैं ....

तेरी बाहों में बड़े प्यार से आये थे मगर ..
तेरे पंजो से बहुत छटपटा के निकले हैं ...

तूने भी दिल को दुखने की इन्तहा कर दी...
हम भी महफ़िल से मगर मुस्कुरा के निकले हैं ..

कई लोगो से मेरी नौकरी की बात हुई ...
बहुत से काम तो हाथो में आ के निकले हैं ...

मेरे ही ज़ब्त ने बेचैन किया है तुझको ..
ये तेरे आंसू मुझे आजमा के निकले हैं ...

बड़े तैराक हैं ये मैंने खुद भी देखा है ...
यहाँ कूदे थे .. बहुत दूर जा के निकले हैं ..

धड़कने रुक गयी , दम भी निकल गया मेरा..
सभी अरमान तेरे पास आ के निकले हैं ..

हमने हर नौकरी बर्बाद होके छोड़ी है ...
सबको लगता है के पैसा कमा के निकले हैं ..

ऐसे वैसो को भी दिल में बसा लिया ''सतलज'
बहुत से लोग तो बातें बना के निकले हैं ...

Monday, June 25, 2012

कोशिश है ये अफसाना किसी अंजाम तक पहुंचे

देखना है ये नफरत और किस मकाम तक पहुंचे
गोधरा से चले थे हम अक्षरधाम तक पहुंचे

तुझको भूल जाऊ या तुझे अपना लूं मैं
कोशिश है ये अफसाना किसी अंजाम तक पहुंचे

--सतलज राहत

Sunday, April 22, 2012

इससे पहले के पुराना पड़ जाये .

मेरे पीछे ये ज़माना पड़ जाये ..
जाने कब शहर से जाना पड़ जाये ..

तू किसी को भी अपना दिल दे दे ..
कही मुझको न चुराना पड़ जाये ..

छुड़ा के पीछा वो ये सोचती है
फिर से पीछे वो दीवाना पड़ जाये ..

आ भी जा के नया है इश्क मेरा ..
इससे पहले के पुराना पड़ जाये .

--सतलज राहत

Tuesday, April 3, 2012

राह कब तक वो मेरी राजकुमारी देखे

प्यार का नश्शा , मोहब्बत की खुमारी देखे
जो भी देखे यहाँ .. मुझ पर तुझे तारी देखे

बस तेरे आरिज़_ओ_ रुखसार ही आते हैं नज़र
किसको फुर्सत जो यहाँ चोट हमारी देखे

मुझे भी शहर में छोटी सी सल्तनत दे दे
राह कब तक वो मेरी राजकुमारी देखे

--सतलज राहत

Saturday, January 21, 2012

इश्क में उसको गिरफ्तार कर के छोड़ दिया ..

समंदर जैसा बेक़रार कर के छोड़ दिया..
इश्क में उसको गिरफ्तार कर के छोड़ दिया ..

मौत अब आ ही जा तू साथ दवाई लेकर ..
ज़िन्दगी ने मुझे बीमार कर के छोड़ दिया ...

नसीब ने भी अजब खेल दिखाया के हमे ...
हर एक शय का तलबगार कर के छोड़ दिया ...

उम्र गुजरेगी उसकी भी ग़लतफ़हमी में ...
हमने भी इश्क का इज़हार कर के छोड़ दिया ...

प्यार में सबको ही मैंने सबक सिखाया है ...
तुझे भी कितना समझदार कर के छोड़ दिया ...

वो तो गलियों में दीवानी सी फिरा करती थी...
मैंने बस थोडा सा सिंगार कर के छोड़ दिया..

हाँ सच है प्यार कई बार भी हो सकता है ...
"सतलज" तुने क्यों एक बार कर के छोड़ दिया..

--सतलज राहत

हम बहुत दूर तक चले आये ..

दिल में फिर जैसे ज़लज़ले आये ...
ख्याल तेरे यूं चले आये.. ...

हमने छोड़ा नहीं तेरा दामन ...
कितने मौसम बुरे भले आये..

गुज़ारिश हो रही है लम्हों से ...
कोई तो साथ तुझे ले आये ....

जिनकी नियत में बस मोहब्बत थी. ..
उनकी किस्मत में फासले आये...

हैरान रह गई सारी दुनिया ....
खुदा के ऐसे फैसले आये...

बिछड़ते वक़्त बस यही गम है ....
हम बहुत दूर तक चले आये ...

शाम होते ही मेरी आँखों में ...
कितनी यादो के काफिले आये..

"सतलज" तुमको बहुत रोका था...
तुम नहीं माने , तुम चले आये......

--सतलज राहत

Tuesday, October 25, 2011

तेरे इस पाकीज़ा आँचल पे दाग लग जाए

कुछ साजिशों में ये मेरे दिमाग लग जाए
मेरे हाथो में जो तेरा सुहाग लग जाए

तेरी और मेरी ये दुनिया जो कहानी सुनले
तेरे इस पाकीज़ा आँचल पे दाग लग जाए

सफ़ेद बर्फ सा वो जो बदन दिखता है
मैं उसे छू लूं किसी दिन तो आग लग जाए

--सतलज रहत

Tuesday, October 18, 2011

मेरा दुश्मन भी मेरे भाइयों में आता है

अब इसका ज़िक्र भी सच्चाइयों में आता है
मेरा दुश्मन भी मेरे भाइयों में आता है

लब पे नाम तो बरसों तलक नहीं आता
तेरा ख़याल पर तनहाइयों में आता है

हम शिखर भी दंगाइयों का होते हैं
हमारा नाम भी दंगाइयों में आता है

कभी मैं उसको रोने से रोकता ही नहीं
मुझे सुकून ही गहराइयों में आता है

तुम्हारे साथ जो तनहाइयों में रहता है
वो मेरे पास भी तनहाइयों में आता है

मेरा मौसम सा बचपन जो खो गया थ कहीं
अभी वो सुबह की अंगडाईयों में आता है

वो अब सुनाई भी खामोशियों में देता है
वो अब दिखाई भी परछाइयों में आता है

सुना है उसकी आँखें भी भीग जाती हैं
'सतलज' याद जब तनहाइयों में आता है

--सतलज राहत

Thursday, October 6, 2011

वो जुगनू है लेकिन गुरूर करता है

सादा लफ्ज़ कहाँ इतना सुरूर करता है
ये शायर कोई नशा तो ज़रूर करता है

मैं सूरज हूँ पर नज़र झुका के चलता हूँ
वो जुगनू है लेकिन गुरूर करता है

--सतलज राहत

Thursday, September 29, 2011

बहुत बेचैन करती है, बहुत बेहाल करती है

बहुत बेचैन करती है, बहुत बेहाल करती है
किसी से chat करती है, किसी को कॉल करती है

--सतलज राहत

Thursday, September 22, 2011

कहा करती थी भूल जाऊँगी शाम होते ही रो पड़ी हो न ?

मेरी किस्मत की हथकड़ी हो न ?
तुम मेरे साथ हर घडी हो न ?

मैं सोच सोच के थक जाता हूँ
तुम मेरी सोच से बड़ी हो न ?

बहुत तड़पा हूँ तुम्हे पाने को
तुम भी तकदीर से लड़ी हो न ?

मुझे इस रास्ते में छोड़ के
तुम मेरी सोचो में चल पड़ी हो न ?

कहा करती थी भूल जाऊँगी
शाम होते ही रो पड़ी हो न ?

मैं तनहा किस तरह रह पाऊंगा
जिंदगी तुम बहुत बड़ी हो न ?

सफर में लुफ्त बहुत आएगा
ठोकरों राह में पड़ी हो न?

बुलंदियों, गुरूर था तुमको
मेरे पैरों में गिर पड़ी हो न ?

सतलज आज तक नहीं भूला
एक लड़की का फुलझड़ी होना

--सतलज रहत

Tuesday, September 13, 2011

तुझे यकीन मेरी जान नहीं आएगा

हमारी बातो पे ईमान नहीं आएगा
तो तुझे इश्क का ये ज्ञान नहीं आएगा

अरे नादान मोहब्बत का इम्तेहान है ये
कोई सवाल अब आसान नहीं आएगा

मुझे खुद उठ के आसमान चूम लेना है
मेरी ज़मीन पे आसमान नहीं आएगा

है अब ये हाल के सोती नहीं वो रातो में
उसे लगा था मेरा ध्यान नहीं आएगा

आ ज़रा बैठ हम दो-चार घडी बात करे
इतनी जल्दी तो इत्मिनान नहीं आएगा

मुझे यकीन है मोहब्बत में जान भी दे दूं
तुझे यकीन मेरी जान नहीं आएगा

भटकता हू भरी बरसात में सूखा सूखा
अब भी मिलने, क्या बे-ईमान नहीं आएगा?

तू बस ये मान वो आएगा, तो वो आएगा
नहीं आएगा, तो ये मान नहीं आएगा

जो भी उलझन है तेरे दिल कि वो बता मुझको
झिझक रहेगी तो फिर ज्ञान नहीं आएगा

कई ठिकाने इसी शहर में पता है मुझे
कोई हमारे दरमियान नहीं आएगा

हिजरत कर गए सब ख्वाब मेरी आँखों से
के दिल में अब कोई अरमान नहीं आएगा

फिर उसी इश्क के पंजे में फंस गया 'सतलज'
कोई बचाने तेरी जान नहीं आएगा

--सतलज राहत

Monday, August 8, 2011

तुझे महसूस ही करना है मुझको

तेरे वादों मे जब तक दम रहेगा
ये मेरा हौंसला कायम रहेगा

तेरे अंदर वही हवा रहेगी
मेरे अंदर वही आदम रहेगा

ज़माना चाहतों का आ गया है
कई दिन तक यही मौसम रहेगा

तुझे महसूस ही करना है मुझको
तुझे लिखने लगूं तो कम रहेगा

सोच पथरा गई हैं सब की सब
तेरा ख्याल पर रेशम रहेगा

कुछ दिनों तो हुमारे साथ थीं तुम
बहुत दिन अब तुम्हारा गम रहेगा

मेरी पेशनी पे ये बल रहेगा
तुम्हारी ज़ुलफ मे ये ख़म रहेगा

कोई भी ज़ख़्म दे मुझे लेकिन
तुम्हारे पास ही मरहम रहेगा

ख्वाब आयेंगे पर बेजान हो कर
दिल भी धड़केगा पर बेदम रहेगा

मेरे बगैर तेरे शानो पर
जो भी आँचल रहेगा, नम रहेगा

रात अपनी पे उतर आई है
सवेरे हर तरफ मातम रहेगा

ये भी दिल तोड़ क जायेगी एक दिन
मुझे इस बात का भी गम रहेगा

बिछड़ के टूट-फूट जाऊंगा
तुझे अफ़सोस थोड़ा कम रहेगा

'सतलज' तेरी ही जयकार होगी
'सतलज' तेरा ही परचम रहेगा!!!

--सतलज राहत

Sunday, July 24, 2011

जहाँ तुम चलते हो, वो हर किसी का रास्ता है

दोस्त ये जो चीता-कशी का रास्ता है
ये शोहरत का नहीं है, ख़ुदकुशी का रास्ता है

जहाँ हम चलते हैं वहाँ सिर्फ हम ही चलते हैं
जहाँ तुम चलते हो, वो हर किसी का रास्ता है

--सतलज राहत

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Monday, July 11, 2011

एक अधूरी सी कहानी है मुकम्मल कर दे

फरेब दे दे इश्क़ मे मुझे पागल कर दे
एक अधूरी सी कहानी है मुकम्मल कर दे

नही औकात के सोचों को लफ़्ज़ों मे ढालूं
मेरे खुदा मेरे अहसास को ग़ज़ल कर दे

तू मेरे वास्ते बहाए तो अज़ीम खुदा
तेरी आँखो के हर आँसू को गंगाजल कर दे

उसी ने सोच के सब मुश्किले बनाई हैं
वो अगर चाहे तो सब मुश्किलो का हल कर दे

मैं जो भी चाहू ज़िंदगी मे उससे पा के रहूँ
मेरे खुदा मुझे इस बात पे अटल कर दे

यकीन रख वो हक़ीकत मे मुझको ढूँढेगी
उसके ख्वाबो मे ज़रा सा मेरा दखल कर दे

बात अच्छी है के हर बात मान जाता है
वो ज़िद पे आए तो हर बात मे खलल कर दे

'सतलज' ये पहली मुलाकात बहुत अच्छी थी
उसके होंठो की हर इक बात को ग़ज़ल कर दे

-सतलज राहत

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Saturday, July 9, 2011

झूठी तोहमत लगाए जा रहा है

झूठी तोहमत लगाए जा रहा है
यही गम मुझको खाए जा रहा है

मुझे यादें जलाए जा रही हैं
मुझे बादल भीगाए जा रहा है

तेरे आने की कुछ उम्मीद नही
तेरा ख्याल आए जा रहा है

धूप मे ही करेगा याद मुझको
अभी वो साए साए जा रहा है

मुझसे कुछ ख़ैरियत भी पूछ मेरी
अपने किस्से सुनाए जा रहा है

मेरा ये है, के मैं वही पे हूँ
वक़्त का ये है, जाए जा रहा है

गहरा ज़ख़्म है कोई दिल मे
मुसलसल मुस्कुराए जा रहा है

इतने नखरे कहा उठाने थे
कितने नखरे उठाए जा रहा है

छुपाना याद नही है उसको
बड़ी बातें बनाए जा रहा है

वही तुझको बुलाना भूल गया
तो तू क्या बिन बुलाए जा रहा है

मेरी सोचो मे आने लग गया है
मेरी नींदें चुराए जा रहा है

मुझे बस तुझसे यही कहना है
ये कैसे दिन दिखाए जा रहा है

मैं कोई अपने काम आ ना सका
खुदा भी आज़माए जा रहा है

'सतलज' मार रहा है खुद को
अपना लिखा मिटाए जा रहा है!!!

--सतलज राहत

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