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Monday, August 31, 2009

हमें तो अब भी वो गुज़रा ज़माना याद आता है

हमें तो अब भी वो गुज़रा ज़माना याद आता है
तुम्हें भी क्या कभी कोई दीवाना याद आता है

हवायें तेज़ थी, बारिश भी थी, तूफान भी था लेकिन
ऐसे में तेरा वादा निभाना याद आता है

गुज़र चुकी थी बहुत रात बातों बातों में
फिर उठ के तेरा वो शम्मा बुझाना याद आता है

घटायें कितनी देखी हैं पर मुझे 'असरार'
किसी का रुख पे ज़ुल्फें गिराना याद आता है

--असरार अनसारी