मेरी दास्तान-ए-हसरत वो सुना सुना के रोये
मेरे आज़माने वाले मुझे आज़मा के रोये
[दास्तान-ए-हसरत=tale of desire]
कोई ऐसा अहल-ए-दिल हो के फ़साना-ए-मुहब्बत
मैं उसे सुना के रो~uuँ वो मुझे सुना के रोये
[अहल-ए-दिल=resident of the heart;; फ़साना=tale]
मेरी आरज़ू की दुनिया दिल-ए-नातवाँ की हसरत
जिसे खो के शादमाँ थे उसे आज पा के रोये
[नातवाँ=weak; शादमाँ=happy]
तेरी बेवफ़ाइयों पर तेरी कज_अदाइयों पर
कभी सर झुका के रोये कभी मूँह छुपा के रोये
[बेवफ़ाई=infidelity; कज-अदाई=crudity/lack of gentility]
जो सुनाई अन्जुमन में शब-ए-ग़म की आप_बीती
कई रो के मुस्कुराये कई मुस्कुरा के रोये
[अन्जुमन=gathering; आप-बीती=first hand experience]
--सैफुद्दीन सैफ
Source : http://www.urdupoetry.com/saif03.html
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Saturday, November 19, 2011
मैं ये कैसे मान जाऊं के वो दूर जा के रोये
Monday, October 26, 2009
आज अश्कों का तार टूट गया
Source : http://www.urdupoetry.com/saif06.html
आज अश्कों का तार टूट गया
रिश्ता-ए-इन्तज़ार टूट गया
यूँ वो ठुकरा के चल दिये गोया
इक खिलौना था प्यार टूट गया
रोये रह-रह कर हिच_कियाँ लेकर
साज़-ए-ग़म बार बार टूट गया
आप की बेरुख़ी का शिकवा क्या
दिल था नापाइदार टूट गया
देख ली दिल ने बेसबाती-ए-गुल
फिर तिलिस्म-ए-बहार टूट गया
'सैफ़' क्या चार दिन की रन्जिश से
इतनी मुद्दत का प्यार टूट गया
--सैफ़ुद्दीन सैफ़
naapaa_idaar = weak/delicate
[besabaatii-e-gul = mortality/short life span of a flower]
[tilism-e-bahaar = (magic)spell of spring]
आज अश्कों का तार टूट गया
रिश्ता-ए-इन्तज़ार टूट गया
यूँ वो ठुकरा के चल दिये गोया
इक खिलौना था प्यार टूट गया
रोये रह-रह कर हिच_कियाँ लेकर
साज़-ए-ग़म बार बार टूट गया
आप की बेरुख़ी का शिकवा क्या
दिल था नापाइदार टूट गया
देख ली दिल ने बेसबाती-ए-गुल
फिर तिलिस्म-ए-बहार टूट गया
'सैफ़' क्या चार दिन की रन्जिश से
इतनी मुद्दत का प्यार टूट गया
--सैफ़ुद्दीन सैफ़
naapaa_idaar = weak/delicate
[besabaatii-e-gul = mortality/short life span of a flower]
[tilism-e-bahaar = (magic)spell of spring]
Wednesday, March 11, 2009
ham ko to gardish-e-haalat pe rona aaya
हम को तो गर्दिश-ए-हालात पे रोना आया
रोने वाले तुझे किस बात पे रोना आया
कैसे मर-मर के गुज़ारी है तुम्हें क्या मालूम
रात भर तारों भरी रात पे रोना आया
कितने बेताब थे रिम झिम में पीयेंगें लेकिन
आई बरसात तो बरसात पे रोना आया
कौन रोता है किसी और के गम की खातिर
सब को अपनी ही किसी बात पे रोना आया
‘सैफ’ ये दिन तो क़यामत की तरह गुज़रा है
जाने क्या बात थी हर बात पे रोना आया
--सैफुद्दीन सैफ
Source : http://www.urdupoetry.com/saif08.html
रोने वाले तुझे किस बात पे रोना आया
कैसे मर-मर के गुज़ारी है तुम्हें क्या मालूम
रात भर तारों भरी रात पे रोना आया
कितने बेताब थे रिम झिम में पीयेंगें लेकिन
आई बरसात तो बरसात पे रोना आया
कौन रोता है किसी और के गम की खातिर
सब को अपनी ही किसी बात पे रोना आया
‘सैफ’ ये दिन तो क़यामत की तरह गुज़रा है
जाने क्या बात थी हर बात पे रोना आया
--सैफुद्दीन सैफ
Source : http://www.urdupoetry.com/saif08.html
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