रहा फ़िर देर तक मैं साथ उसके
भले वो देर तक ठहरा नहीं था
--हसती मल हसती
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Sunday, November 22, 2009
Saturday, July 25, 2009
टूट जाने तलक गिरा मुझको
टूट जाने तलक गिरा मुझको
कैसी मिट्टी का हूं बता मुझको
मेरी खुश्बू भी मर ना जाये कहीं
मेरी जद से ना कर जुदा मुझको
घर मेरे हाथ बाँध देता है
वरना मैदान में देखना मुझको
अक़्ल कोई सज़ा है या इनाम
बड़ा सोचना पड़ा मुझको
हुस्न क्या चन्द रोज़ साथ रहा
आदतें अपनी दे गया मुझको
देख भगवे लिबास का जादू
सब समझते हैं पारसा मुझको
कोई मेरा मरज़ तो पहचाने
दर्द क्या और क्या दवा मुझको
मेरी ताकत ना जिस जगह पहुँची
उस जगह प्यार ले गया मुझको
ज़िन्दगी से नहीं निभा पाया
बस यही एक ग़म रहा मुझको
--हस्ती मल हस्ती
कैसी मिट्टी का हूं बता मुझको
मेरी खुश्बू भी मर ना जाये कहीं
मेरी जद से ना कर जुदा मुझको
घर मेरे हाथ बाँध देता है
वरना मैदान में देखना मुझको
अक़्ल कोई सज़ा है या इनाम
बड़ा सोचना पड़ा मुझको
हुस्न क्या चन्द रोज़ साथ रहा
आदतें अपनी दे गया मुझको
देख भगवे लिबास का जादू
सब समझते हैं पारसा मुझको
कोई मेरा मरज़ तो पहचाने
दर्द क्या और क्या दवा मुझको
मेरी ताकत ना जिस जगह पहुँची
उस जगह प्यार ले गया मुझको
ज़िन्दगी से नहीं निभा पाया
बस यही एक ग़म रहा मुझको
--हस्ती मल हस्ती
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