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Monday, October 5, 2009

दामन पे कोई छींट, न खंजर पे कोई दाग

दिन एक सितम एक सितम रात करो हो
क्या दोस्त हो दुश्मन को भी तुम मात करो हो
दामन पे कोई छींट, न खंजर पे कोई दाग़
तुम कत्ल करो हो, के करामात करो हो
--कलीम आजिज़