Showing posts with label sagar. Show all posts
Showing posts with label sagar. Show all posts

Sunday, May 16, 2010

मुझसे गिले हैं, मुझपे भरोसा नहीं उसे

मुझसे गिले हैं, मुझपे भरोसा नहीं उसे
ये सोच कर हम ने भी तो रोका नहीं उसे

वो शक्स कभी चाँद सितारों से पूछे
है कौन सी वो रात, जब सोचा नहीं उसे

अलफ़ाज़ तीर बन के उतारते रहे दिल में
सुनते रहे चुप चाप ही, टोका नहीं उसे

सागर ये मोहब्बत नहीं असूल-ए-वफ़ा है
हम जान तो देंगे मगर धोका नहीं उसे

--सागर

Tuesday, March 30, 2010

मैंने कागज़ पे भी देखी हैं बना कर आँखें

मुझ से मिलती हैं तो मिलती हैं चुरा कर आँखे
फिर वो किसके लिए रखती है सज़ा कर आँखें

मैं उन्हें देखता रहता हूँ जहाँ तक देखूं
एक वो हैं, के जो देखे ना, उठा कर आँखें

उस जगह आज भी बैठा हूँ अकेला यारो
जिस जगह छोड़ गये थे वो मिला कर आँखें

मुझ से नज़रें वो अक्सर चुरा लेता है सागर
मैंने कागज़ पे भी देखी हैं बना कर आँखें

--सागर

Saturday, November 21, 2009

मुझ से नज़रें वो अक्सर चुरा लेता है सागर

मुझ से नज़रें वो अक्सर चुरा लेता है सागर
मैंने काग़ज़ पर भी देखी हैं बना कर आँखें
--सागर