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Saturday, June 20, 2009

अपने साये से भी अश्क़ों को छुपा कर रोना

अपने साये से भी अश्क़ों को छुपा कर रोना
जब भी रोना हो चराग़ों को बुझा कर रोना

हाथ भी जाते हुये वो तो मिला कर ना गया
मैने चाहा जिसे सीने से लगा कर रोना

तेरे दीवाने का क्या हाल किया है ग़म ने
मुस्कुराते हुये लोगों में भी जा कर रोना

लोग पढ़ लेते हैं चेहरे पे लिखीं तहरीरें
इतना दुशवार है लोगों से छुपा कर रोना

--निसार तरीन जाज़िब


Source : http://www.urdupoetry.com/jazib01.html