मेरी किस्मत में तू नहीं शायद
मैं तेरा इंतज़ार करता हूँ
मैं तुझे कल भी प्यार करता था
मैं तुझे अब भी प्यार करता हूँ
आज समझी वो प्यार को शायद
आज मैं तुझसे प्यार करती हूँ
कल मेरा इंतज़ार था तुझको
आज मैं इंतज़ार करती हूँ
मेरी किस्मत में तू नहीं शायद
सोचता हूँ के मेरी आँखों में
क्यों सजाये थे प्यार के सपने
हर गम टपक रहा है मेरा आंसुओं में ढल कर
वो नज़र से छुप कर, मेरी जिंदगी बदल कर
सोचता हूँ के मेरी आँखों में
क्यों सजाये थे प्यार के सपने
तुझसे मांगी थी इक खुशी मैंने
तूने गम भी नहीं दिए अपने
जिंदगी बोझ बन गयी अब तो
अब तो जीता हूँ और न मरता हूँ
मैं तुझे कल भी प्यार करता था
मैं तुझे अब भी प्यार करता हूँ
मेरी किस्मत में तू नहीं शायद
अब न टूटे ये प्यार के रिश्ते
फूलों के साथ काँटों की चुभन भी देखते जाओ
हसी तो देख ली, दिल की जलन भी देखते जाओ
अब न टूटे ये प्यार के रिश्ते
अब ये रिश्ते सँभालने होंगे
मेरी राहों से तुझको कल की तरह
गम के कांटे निकालने होंगे
दिल न जाए खुशी के रस्ते में
गम की परछाईयो से डरती हूँ
कल मेरा इंतज़ार था तुझको
आज मैं इंतज़ार करती हूँ
मेरी किस्मत में तू नहीं शायद...
शायर/लेखक : अमीर कज़लबाश
फिल्म : प्रेम रोग