Showing posts with label दाग देहलवी. Show all posts
Showing posts with label दाग देहलवी. Show all posts

Thursday, April 9, 2009

रंज की जब गुफ्तगू होने लगी

रंज की जब गुफ्तगू होने लगी
आप से तुम, तुम से तू होने लगी
--दाग देहलवी

Wednesday, March 11, 2009

ye jo hai hukm ki mere paas na aaye koii

ये जो है हुक्म कि मेरे पास न आये कोई
इस लिये रुठ रहे हैं के मनाये कोई

ताक में है निगाह-ए-शोख खुदा करे
सामने से मेरे बचता हुआ जाए कोई

हर अल्फाक-ओ-ज़मीं को बताया भी तो क्या
बात वो है जो तेरे दिल की बताये कोई

अपने दाग को मुंह भी न लगाया अफसोस
उस को रखता था कलेजे से लगाये कोई

हो चुका ऐश का जलसा तो मुझे खत भेजा
आप की तरह से मेहमां बुलाये कोई

-- दाग देहलवी