सूरज , सितारे , चाँद मेरे साथ में रहे
जब तक तुम्हारे हाथ मेरे हाथ में रहे
और शाखों जो टूट जाये वो पत्ते नही है हम
आंधी से कोई कह दे कि औकात में रहे
--राहत इंदोरी
If you know, the author of any of the posts here which is posted as Anonymous.
Please let me know along with the source if possible.
Sunday, March 18, 2012
आंधी से कोई कह दे कि औकात में रहे
Sunday, January 8, 2012
एक नया मोड़ देते हुए फिर फ़साना बदल दीजिये
एक नया मोड़ देते हुए फिर फ़साना बदल दीजिये
या तो खुद ही बदल जाइए या ज़माना बदल दीजिये
अहल-ए-हिम्मत ने हर दौर मैं कोह* काटे हैं तकदीर के
हर तरफ रास्ते बंद हैं, ये बहाना बदल दीजिये
[कोह=पहाड़]
--मंज़र भोपाली
Thursday, October 6, 2011
वादा हैं..मेरा.. कि.. मैं नहीं हारूँगा...
माना वक़्त नहीं.. और.. बाकी कई काम सही...
राह भी हैं.. लम्बी.. और.. ढलती ये शाम सही...
अंजाम से पहले ..खुद को.. ना ..नकारुंगा..
वादा हैं..मेरा.. कि.. मैं नहीं हारूँगा...
जीत के बनेंगी पायदान..चट्टानें मुश्किलों की ..
हिम्मतो से बदलूँगा..लकीरे इन हथेलियों की...
कि हस्ती.. अब अपनी..हर कीमत सवारूँगा
वादा हैं.. मेरा.. कि .. मैं नहीं हारूँगा...
चाहए कितनी ही स्याह.. मायूसी नजर आती हो...
हौसलों कि चांदनी चाहे.. मद्धम हुई जाती हो...
कर मजबूत खुद को.. वक़्त-ऐ-मुफलिसी गुजारूँगा...
वादा हैं .. मेरा.. कि.. मैं नहीं हारूँगा...
आफताब नहीं तो क्या..ऑंखें उम्मीद से रोशन हैं..
ज़माने को नहीं.. तो क्या.. मुझे भरोसा हरदम हैं...
पाउँगा मंजिल ख्वाबो की.. चाँद जमी उतारूंगा...
वादा हैं .. मेरा.. कि.. मैं नहीं हारूँगा...
हार हो या जीत..मेरी हस्ती कोई फर्क ना आ जायेगा
कि 'आलोक' हर हाल यार.. शख्स वही रह जाएगा...
इन फिजूल पैमाइशो पर अब.. खुद को ना उतारूंगा...
वादा हैं .. मेरा.. कि.. मैं नहीं हारूँगा...
आलोक मेहता..
Sunday, September 4, 2011
रवायतोँ की सफेँ तोड़कर बढ़ो वरना
रवायतोँ की सफेँ तोड़कर बढ़ो वरना
जो तुमसे आगे हैँ वो रास्ता नहीँ देँगे
--राहत इंदोरी
सफेँ=कतारेँ
Sunday, July 24, 2011
जहाँ तुम चलते हो, वो हर किसी का रास्ता है
दोस्त ये जो चीता-कशी का रास्ता है
ये शोहरत का नहीं है, ख़ुदकुशी का रास्ता है
जहाँ हम चलते हैं वहाँ सिर्फ हम ही चलते हैं
जहाँ तुम चलते हो, वो हर किसी का रास्ता है
--सतलज राहत
Satlaj Rahat on Facebook
Tuesday, June 14, 2011
चराग बन के जल सकेगा क्या ?
चराग बन के जल सकेगा क्या ?
मोम जैसा पिघल सकेगा क्या?
तूने जूते तो पहले लिए मेरे
चाल भी मेरी चल सकेगा क्या ?
--सतलाज राहत
Satlaj on facebook
Sunday, June 5, 2011
मुसीबतों से उभरती है शक्सियत यारो
मुसीबतों से उभरती है शक्सियत यारो
जो पत्थरों से न उलझे वो आइना क्या है
--वसीम बरेलवी
Saturday, April 30, 2011
मैं ठोकर में आसमान रखता हूँ !
हलक़ में अपनी ज़ुबान रखता हूँ !
मैं चुप हूँ कि तेरा मान रखता हूँ !
मेरी बुलंदियों से रश्क कर तू भी
मैं ठोकर में आसमान रखता हूँ !
--अज्ञात
Thursday, May 6, 2010
मंजिल भी नहीं पाई, और रास्ता भी नहीं बदला
कश्ती भी नहीं बदली, दरिया भी नहीं बदला,
हम डूबने वालों का जज्बा भी नहीं बदला,
है शौक-ए-सफर ऐसा, इक उम्र हुई हम ने,
मंजिल भी नहीं पाई, और रास्ता भी नहीं बदला
--अज्ञात
Sunday, March 7, 2010
दुआ करो के सलामत रहे मेरी हिम्मत
दुआ करो के सलामत रहे मेरी हिम्मत
ये एक चिराग कईं आंधियों पे भारी है
--अज्ञात
Saturday, June 13, 2009
सीढ़ीयां उन्हें मुबारक हों
जिन्हें छत तक जाना है
जिनकी मन्ज़िल आसमां है
अपना रास्ता खुद बनाना है
--अज्ञात
Tuesday, May 5, 2009
गिरते हैं शहसवार ही मैदान-ए-जंग में
वो तिफ़्ल क्या गिरेगा जो घुटनों के बल चले
--अलामा इक़बाल
tifl=Baby
Monday, May 4, 2009
गुल से लिपटी हुई तितली को गिराकर देखो
आंधियों तुमने दरख्तों को गिराया होगा
--कैफ भोपाली