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Saturday, February 19, 2011

नसीब को भी तुम इम्तिहान में रखना

जो घर में है वो तो नसीब है लेकिन
जो खो गया है उसको भी मकान में रखना

सवाल तो मेहनत से ही हल होते हैं
नसीब को भी तुम इम्तिहान में रखना

--निदा फाजली

Monday, June 7, 2010

बात कम कीजे ज़हनात को छुपाते रहिये

बात कम कीजे ज़हनात को छुपाते रहिये
ये नया शहर है कुछ दोस्त बनाते रहिये
दुश्मनी लाख सही खत्म न कीजिये रिश्ता
दिल मिले या न मिले, हाथ मिलाते रहिये

--निदा फाजली
ज़हनात=intellect

Monday, April 12, 2010

मुँह की बात सुने हर कोई, दिल के दर्द को जाने कौन

मुँह की बात सुने हर कोई, दिल के दर्द को जाने कौन
आवाज़ों के बाज़ारों में, ख़ामोशी पहचाने कौन ।

सदियों-सदियों वही तमाशा, रस्ता-रस्ता लम्बी खोज
लेकिन जब हम मिल जाते हैं, खो जाता है जाने कौन ।

जाने क्या-क्या बोल रहा था, सरहद, प्यार, किताबें, ख़ून
कल मेरी नींदों में छुपकर, जाग रहा था जाने कौन ।

वो मेरा आईना है और मैं उसकी परछाई हूँ
मेरे ही घर में रहता है, मुझ जैसा ही जाने कौन ।

किरन-किरन अलसाता सूरज, पलक-पलक खुलती नींदें
धीमे-धीमे बिखर रहा है, ज़र्रा-ज़र्रा जाने कौन

--निदा फाजली


Thursday, February 18, 2010

हर घडी खुद से उलझना है मुक़द्दर मेरा

हर घडी खुद से उलझना है मुक़द्दर मेरा
मैं ही कश्ती हू मुझी में है समंदर मेरा

किससे पूछू की कहाँ गुम हूँ बरसों से
हर जगह ढूंढ़ता फिरता है मुझे घर मेरा

एक से हो गए मौसमों के चहरे सारे
मेरी आँखों से कहीं खो गया मंज़र मेरा

मुद्दतें बीत गई ख्वाब सुहाना देखे
जगता रहता है हर नींद में बिस्तर मेरा

आईना देखके निकला था मैं घर से बाहर
आज तक हाथ में महफूज़ है पत्थर मेरा

लेखक - निदा फ़ाज़ली

Wednesday, February 3, 2010

ले के तन के नाप को घूमे बस्ती गाँव

ले के तन के नाप को घूमे बस्ती गाँव
हर चादर के घेर से बाहर निकले पाँव

--निदा फाजली

सबकी पूजा एक सी अलग-अलग है रीत

सबकी पूजा एक सी अलग-अलग है रीत
मस्जिद जाए मौलवी, कोयल गाये गीत

--निदा फाजली

छोटा करके देखिये जीवन का विस्तार

छोटा करके देखिये जीवन का विस्तार,
आँखों भर आकाश है बाहों भर संसार

--निदा फाजली

मैं रोया परदेस में भीगा माँ का प्यार

मैं रोया परदेस में भीगा माँ का प्यार,
दुःख ने दुःख से बात की, बिन चिट्ठी बिन तार

--निदा फाजली

Thursday, January 7, 2010

दिल के दर्द को जाने कौन?

मुंह की बात सुने हर कोई, दिल के दर्द को जाने कौन?
आवाजों के बाज़ारों में, ख़ामोशी,पहचाने कौन?
--निदा फाज़ली

Monday, September 28, 2009

सातो दिन भगवान के, क्या मंगल क्या वीर

सातो दिन भगवान के, क्या मंगल क्या वीर
जिस दिन सोया देर तक, भूखा रहा फ़कीर



--निदा फ़ाज़ली

Another version of this is here

Source : http://www.bbc.co.uk/hindi/entertainment
/story/2006/09/060915_nida_column6.shtml

Sunday, June 28, 2009

कभी कभी हम यूँ भी दिल को बहलाया करते हैं

कभी कभी हमने अपने दिल को यूँ भी बहलाया है
जिन बातों को हम नहीं समझे, औरों को समझाया हैं
--निदा फ़ाज़ली

Thursday, June 4, 2009

तन्हा तन्हा हम रो लेंगे महफ़िल महफ़िल गायेंगे

तन्हा तन्हा हम रो लेंगे महफ़िल महफ़िल गायेंगे
जब तक आँसू पास रहेंगे तब तक गीत सुनायेंगे

तुम जो सोचो वो तुम जानो हम तो अपनी कहते हैं
देर न करना घर जाने में वरना घर खो जायेंगे

बच्चों के छोटे हाथों को चाँद सितारे छूने दो
चार किताबें पढ़ कर वो भी हम जैसे हो जायेंगे

किन राहों से दूर है मंज़िल कौन सा रस्ता आसाँ है
हम जब थक कर रुक जायेंगे औरों को समझायेंगे

अच्छी सूरत वाले सारे पत्थर-दिल हो मुमकिन है
हम तो उस दिन रो देंगे जिस दिन धोखा खायेंगे

शायर: निदा फ़ाज़ली

Friday, May 15, 2009

तुम से छूट कर भी, तुम्हे भुलाना आसान न था

तुम से छूट कर भी, तुम्हे भुलाना आसान न था
तुम्हीं को याद किया, तुमको भुलाने के लिये
--निदा फाज़ली

Sunday, April 5, 2009

वो एक ही चेहरा तो नही सारे जहाँ में

वो एक ही चेहरा तो नही सारे जहाँ में
जो दूर है वो दिल से उतर क्यों नही जाता
--निदा फ़ाज़ली

कुछ तबीयत ही मिली थी ऐसी

कुछ तबीयत ही मिली थी ऐसी, के चैन से जीने की सूरत ना हुई
जिसको चाहा उसको अपना ना सके, जो मिला उस से मोहब्बत ना हुई
--निदा फ़ाज़ली

Thursday, April 2, 2009

न कायम करना कोई राय हमारे बारे में,

तुम मेरे बारे में कोई राय न कायम करना
मेरा वक्त बदलेगा, तुम्हारी राय बदल जायेगी

--निदा फाजली

Sunday, March 29, 2009

दुश्मनी जम कर करो पर ये गुंजाइश रहे

दुश्मनी जम कर करो पर ये गुंजाइश रहे
जब भी हम दोस्त बनें तो शर्मिंदा न हों
--निदा फाज़ली

अच्छा सा कोई मौसम, तनहा सा कोई आलम

अच्छा सा कोई मौसम, तनहा सा कोई आलम
हर वक़्त का रोना तो बेकार का रोना है
--निदा फ़ाज़ली