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Sunday, July 11, 2021
Saturday, October 22, 2011
तुम आये हो ना शब-ए-इंतज़ार गुजरी है
तुम आये हो ना शब-ए-इंतज़ार गुजरी है
तलाश में है सेहर बार बार गुजरी है
--फैज़ अहमद फैज़
वो बात सारे फ़साने में जिसका ज़िक्र न था
वो बात सारे फ़साने में जिसका ज़िक्र न था
वो बात उनको बहुत नागवार गुजरी है
--फैज़ अहमद फैज़
Sunday, August 28, 2011
दिल में अब यूँ तेरे भूले हुये ग़म आते हैं
दिल में अब यूँ तेरे भूले हुये ग़म आते हैं
जैसे बिछड़े हुये काबे में सनम आते हैं
इक इक कर के हुये जाते हैं तारे रौशन
मेरी मन्ज़िल की तरफ़ तेरे क़दम आते हैं
रक़्स-ए-मय तेज़ करो, साज़ की लय तेज़ करो
सू-ए-मैख़ाना सफ़ीरान-ए-हरम आते हैं
कुछ हमीं को नहीं एहसान उठाने का दिमाग
वो तो जब आते हैं माइल-बा-करम आते हैं
और कुछ देर ना गुज़रे शब-ए-फ़ुर्क़त से कहो
दिल भी कम दुखता है वो याद भी कम आते हैं
--फैज़ अहमद फैज़
Source : http://www.urdupoetry.com/faiz24.html
दिल में अब यूं तेरे भूले हुए ग़म आते हैं
दिल में अब यूं तेरे भूले हुए ग़म आते हैं
जैसे बिछड़े हुए क़ाबे में सनम आते हैं
--फैज़ अहमद फैज़
Friday, October 22, 2010
बात वो कब की भुला दी हमने
अब के यूं दिल को सज़ा दी हमने
उसकी हर बात भुला दी हमने
एक एक फूल बहुत याद आया
शाख-ए-गुल जब वो जला दी हमने
आज तक जिस पे वो शर्माते हैं
बात वो कब की भुला दी हमने
शहर-ए-जहां राख से आबाद हुआ
आअज जब दिल की बुझा दी हमने
आज फिर याद बहुत आया वो
आज फिर उसको दुआ दी हमने
कोई तो बात है उस में
हर ख़ुशी जिस पे लुटा दी हमने
--फैज़ अहमद फैज़
Wednesday, October 13, 2010
Saturday, May 30, 2009
दिल नाउमीद तो नहीं नाकाम ही तो है
लम्बी है ग़म की शाम मगर शाम ही तो है
--फैज़ अहमद फैज़
Wednesday, April 29, 2009
इक फुरसत-ए-गुनाह मिली वो भी चार दिन
देखे हैं हमने हौंसले परवर-दिगार के
--फैज़ अहमद फैज़