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Saturday, November 19, 2011

बेकरारी गयी, करार गया

बेकरारी गयी, करार गया
तर्क-ए-इश्क और मुझको मार गया

वो जो आये तो खुश्क हो गए अश्क
आज गम का भी ऐतबार गया

हम न हंस ही सके, न ही रो सके
वो गए या हर इख्तियार गया

आप की जिद-ए-बे-महल से कलीम
सब की नज़रों का ऐतबार गया

आ गए वो तो अब ये रोना है
लुत्फ़-ए-गम, लुत्फ़-ए-इंतज़ार गया

किस मज़े से तेरे बगैर "खुमर"
बे जिए ज़िंदगी गुज़ार गया

--खुमार बरबनकवी

Sunday, March 14, 2010

वो सवा याद आये भुलाने के बाद

वो सवा याद आये भुलाने के बाद
जिंदगी बढ़ गयी ज़हर खाने के बाद
--खुमर बरबनकवी

[सवा = ज्यादा]

Tuesday, April 28, 2009

भूले हैं उन्हें राफ्ता राफ्ता मुद्दतों में हम

भूले हैं उन्हें राफ्ता राफ्ता मुद्दतों में हम
किश्तों में खुदकुशी का मज़ा हम से पूछिये
--खुमर बरबनकवी


Source : http://www.urdupoetry.com/khumar04.html

Wednesday, April 1, 2009

हाल-ए-दिल कह के जब लौटे

हाल-ए-दिल कह के जब लौटे
उनसे कहने की बात याद आई
--खुमर बरबनकवी