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Sunday, April 19, 2009

अंधेरा मांगने आया था रौशनी की भीख

अंधेरा मांगने आया था रौशनी की भीख
हम अपना घर ना जलाते तो क्या करते
--नज़ीर बनारसी

Saturday, April 4, 2009

ये इनायतें गज़ब की, ये बला की मेहरबानी

ये इनायतें गज़ब की, ये बला की मेहरबानी
मेरी खैरियत भी पूछी, किसी और की ज़बानी
--नज़ीर बनारसी

Sunday, March 29, 2009

ये इनायतें गज़ब की, ये बला की मेहरबानी

ये इनायतें गज़ब की, ये बला की मेहरबानी
मेरी खैरियत भी पूछी, किसी और की ज़बानी

मेरा ग़म रुला चुका है तुझे बिखरी ज़ुल्फ वाले
ये घटा बता रही है, कि बरस चुका है पानी

तेरा हुस्न सो रहा था, मेरी छेड़ ने जगाया
वो निगाह मैने डाली कि संवर गयी जवानी

मेरी बेज़ुबान आंखों से गिरे हैं चन्द कतरे
वो समझ सके तो आंसू, न समझ सके तो पानी

--नज़ीर बनारसी

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इस गज़ल को जगजीत सिंह ने भी गाया है