मैंने गम-ए-हयात में तुझको भुला दिया
हुस्न-ए-वफ़ा शायर बहुत बेवफा हूँ मैं
इश्क एक सच था तुझसे जो बोला नहीं कभी
इश्क अब वो झूठ है, जो बहुत बोलता हूँ मैं
--जौन इलिया
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Sunday, October 6, 2013
इश्क अब वो झूठ है, जो बहुत बोलता हूँ मैं
Monday, November 7, 2011
नयी ख्वाहिश रचाई जा रही है
नयी ख्वाहिश रचाई जा रही है
तेरी फुरकत मनाई जा रही है
(फुरकत : separation)
निभाई थी न हमने जाने किस से
के अब सब से निभाई जा रही है
--जौन एलिया
Source : http://aligarians.com/2007/05/nayii-khvaahish-rachaaii-jaa-rahii-hai/
बस एक ख़याल चाहिए था
कब उसका विसाल चाहिए था
बस एक ख़याल चाहिए था
(विसाल=meeting)
कब दिल को जवाब से गरज़ थी
होंटों को सवाल चाहिए था
शौक़ एक नफस था, और वफ़ा को
पास-ए-माह-ओ-साल चाहिए था
(नफस : moment, माह-ओ-साल : months and years)
एक चेहरा-ए-सादा था जो हमको
बे-मिस्ल-ओ-मिसाल चाहिए था
(बे-मिस्ल-ओ-मिसाल : incomparable)
एक कर्ब में ज़ात-ओ-ज़िंदगी हैं
मुमकिन को मुहाल चाहिए था
--जौन एलिया
Source : http://aligarians.com/2008/04/kab-uskaa-visaal-chaahiye-thaa/
Wednesday, June 15, 2011
इक ही शख़्स था जहान में क्या
ख़ामोशी कह रही है कान में क्या
आ रहा है मेरे गुमान में क्या
अब मुझे कोई टोकता भी नहीं
यही होता है खानदान में क्या
बोलते क्यों नहीं मेरे हक़ में
आबले पड़ गये ज़ुबान में क्या
मेरी हर बात बे-असर ही रही
नुक़्स है कुछ मेरे बयान में क्या
वो मिले तो ये पूछना है मुझे
अभी हूँ मैं तेरी अमान में क्या
शाम ही से दुकान-ए-दीद है बंद
नहीं नुकसान तक दुकान में क्या
यूं जो तकता है आसमान को तू
कोई रहता है आसमान में क्या
ये मुझे चैन क्यूँ नहीं पड़ता
इक ही शख़्स था जहान में क्या
--जौन इलिया