सबको दिल का हाल सुनाना ठीक नहीं
मानो मेरी बात, ज़माना ठीक नहीं
अपना तो जनमों का नाता है जानम
लोगों की बातों में आना ठीक नहीं
इज्ज़त से खाओ तो रोटी रोटी है,
ज़िल्लत का ये आब-ओ-दाना ठीक नहीं
[आब-ओ-दाना=Water and food]
लपटें तेरे घर तक भी तो आयेंगी
मेरे घर को आग लगाना ठीक नहीं
उससे कहो सजदे नामरहम होते हैं
वक्त-ए-दुआ यादों में आना ठीक नहीं
[नामरहम=impure]
दिल को मेरे ज़ख्मों से छलनी करके
वो कहते हैं यार निशाना ठीक नहीं
जितना पीयो उतनी प्यास बढ़ाता है
साकी तेरा ये पैमाना ठीक नहीं
हर इक दर्द गम-ए-जाना से हल्का है,
दुनिया वालों का गम-खाना ठीक नहीं
[गम-खाना =house of sorrows]
छोडो यारा दर्द के किस्से, उसकी बात,
उसको कलम की नोक पे लाना ठीक नहीं
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Thursday, November 24, 2011
मानो मेरी बात, ज़माना ठीक नहीं
Saturday, November 19, 2011
उसको भूला मगर नहीं जाता
तेरी बातों पे गर नहीं जाता
मेरे शानो से सर नहीं जाता
मैं भी गलियों में कम ही फिरता हूँ
वो भी अब बाम पर नहीं जाता
[बाम=छत]
लाख उसने भुला दिया हमको,
उसको भूला मगर नहीं जाता
शब-ए-हिजरां भी कट ही जायेगी
हिजर में कोई मर नहीं जाता
[शब-ए-हिजरां=जुदाई की रात]
[हिजर=जुदाई]
शिकवा-ए-दाग-ए-ज़ख्म है वरना,
कौन सा ज़ख्म भर नहीं जाता
[शिकवा-ए-दाग-ए-ज़ख्म=complaint of scar of wound]
रब्त-ए-आशोब-ओ-ज़ब्त-ए-रुसवाई
दिल का इक ये हुनर नहीं जाता
[रब्त-ए-आशोब-ओ-रुसवाई=Relation with Problems and Control of Infamy]
आह !! जाता हूँ घर अकेले मैं
साथ इक नौहा-गर नहीं जाता
[नौहा-गर=Mourner, A person who attends a funeral as a relative or friend of the dead person]
ध्यान सजदों में तुझ पे रहता है
काबे जाता हूँ, पर नहीं जाता
कितना रोता है उसकी यादों में
हैफ !! 'यारा' तू मर नहीं जाता
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