पहले हम दोनों वक़्त चुराकर लाते थे
अब तब मिलते हैं जब भी फुरसत होती है
--जावेद अख्तर
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पहले हम दोनों वक़्त चुराकर लाते थे
अब तब मिलते हैं जब भी फुरसत होती है
--जावेद अख्तर
जहाँ यार याद न आए वो तन्हाई किस काम की,
बिगड़े रिश्ते न बने तो खुदाई किस काम की,
बेशक अपनी मंज़िल तक जाना है ,
पर जहाँ से अपना दोस्त ना दिखे
वो ऊंचाई किस काम की!!
--जावेद अख्तर
यही हालात इब्तदा से रहे
लोग हमसे ख़फ़ा-ख़फ़ा-से रहे
बेवफ़ा तुम कभी न थे लेकिन
ये भी सच है कि बेवफ़ा-से रहे
इन चिराग़ों में तेल ही कम था
क्यों गिला फिर हमें हवा से रहे
बहस, शतरंज, शेर, मौसीक़ी
तुम नहीं रहे तो ये दिलासे रहे
उसके बंदों को देखकर कहिये
हमको उम्मीद क्या ख़ुदा से रहे
ज़िन्दगी की शराब माँगते हो
हमको देखो कि पी के प्यासे रहे
--जावेद अख्तर
वो जो अपने हैं क्या वो अपने हैं
कौन दुःख झेले आजमाए कौन
आज फिर दिल है कुछ उदास उदास
देखिये आज याद आये कौन
जावेद अख्तर
मैं जानता हूँ कि ख़ामोशी में ही मस्लहत है
मगर यही मस्लहत मेरे दिल को खल रही है
जावेद अख्तर
[मस्लहत=समझदारी]
दो चार नहीं मुझको फक़त एक ही दिखा दो
वो शक्स जो अंदर से भी बाहर की तरह हो
--जावेद अख्तर
मरहम न सही एक ज़ख्म ही दे दो
महसूस तो हो के कोई हमें भूल नहीं
--जावेद अख्तर
काफिले रेत हुए दश्त-ए-जुनूं में कितने
फिर भी आवारा मिजाजों का सफर जारी है
--जावेद अख्तर
बेसबब यूं ही सर-ए-शाम निकल आते हैं
हम बुलाएं तो उन्हें काम निकल आते हैं
क्या बताऊँ इन हुस्न वालों की ए जावेद
हम बुलाएं तो परदा, वरना सर-ए-आम निकल आते हैं
--जावेद अख्तर
एक ये ख्वाहिश के कोई ज़ख्म न देखे दिल का
एक ये हसरत कि कोई देखने वाला होता
--जावेद अख्तर
Source : https://www.facebook.com/JavedAkhtarJadoo?sk=wall
जब जब दर्द का बादल छाया
जब गम का साया लहराया
जब आँसू पलकों तक आया
जब यह तन्हा दिल घबराया
हमने दिल को ये समझाया
दिल आख़िर तू क्यूँ रोता है
दुनिया में यूँही होता है
यह जो गहरे सन्नाटे हैं
वक़्त ने सबको ही बाँटे हैं
थोड़ा गम है सबका क़िस्सा
थोड़ी धूप है सबका हिस्सा
आँख तेरी बेकार ही नम है
हर पल एक नया मौसम है
क्यूँ तू ऐसे पल खोता है
दिल आख़िर तू क्यूँ रोता है
--जावेद अख्तर
From Movie ZINDAGI NA MILEGI DOBARA
प्यास की कैसे लाये ताब कोई
न हो दरिया तो हो शराब कोई
रात बजती थी दूर शेहनाई
रोया पी के बहुत शराब कोई
कौन सा ज़ख्म किसने बक्शा है
इसका रखे कहाँ तक हिसाब कोई
फिर मैं सुनने लगा हूँ इस दिल की
आने वाला है फिर अज़ाब कोई
--जावेद अख्तर