कहाँ कहाँ होंठों के निशान छोड गये तुम
बेजान एक जिस्म में जान छोड गये तुम
खुद से पूछती रही थी ये कि मैं कौन हूं?
आज मुझ में मेरी पहचान छोड गये तुम
--अनिल पराशर
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Wednesday, September 9, 2009
तुम से करूँ मुहब्बत उसूल की बात है
तुम से करूँ मुहब्बत उसूल की बात है
तुम मेरे लिए सोचो फ़िज़ूल की बात है
रिश्ता नही है तुमसे गीतों का कोई मेरे
ख़ुश्बुओं के हक़ में इक फूल की बात है
सच की ही जीत होगी जानता था मैं भी
अब की नही मगर ये इस्कूल की बात है
मेरे नही हो लेकिन मिलता हूं मैं तुमसे
ये दुआ सलाम भी तो उसूल की बात है
किसी बेवफ़ा की बात नही मेरी शायरी में
आँखों में जो थी झोंकी धूल की बात है
पढ़ते भी हैं मुझको कहते भी हैं मुझसे
मासूम जी शायरी तो फ़िज़ूल की बात है
--अनिल पराशर
तुम मेरे लिए सोचो फ़िज़ूल की बात है
रिश्ता नही है तुमसे गीतों का कोई मेरे
ख़ुश्बुओं के हक़ में इक फूल की बात है
सच की ही जीत होगी जानता था मैं भी
अब की नही मगर ये इस्कूल की बात है
मेरे नही हो लेकिन मिलता हूं मैं तुमसे
ये दुआ सलाम भी तो उसूल की बात है
किसी बेवफ़ा की बात नही मेरी शायरी में
आँखों में जो थी झोंकी धूल की बात है
पढ़ते भी हैं मुझको कहते भी हैं मुझसे
मासूम जी शायरी तो फ़िज़ूल की बात है
--अनिल पराशर
Sunday, August 23, 2009
कभी अपने हाथों में मेरा हाथ नही रखता
कभी अपने हाथों में मेरा हाथ नही रखता
वो साथ तो रहता है मुझे साथ नही रखता
या तो मुझसे कभी मेरे वो सपने ना चुरता
या मेरी आँखों में लंबी सी रात नही रखता
उसने तो दिल से मेरा ये प्यार भी निकाला
सच कहा था दिल में कोई बात नही रखता
फैला के दामन भी उस से प्यार ना मिलेगा
फकीरों के हाथों मे कभी खैरात नही रखता
हर बार नयी ठोकर उस मासूम को मिली है
अपने साथ गुजिश्ता तज़रबात नही रखता
--अनिल पराशर
वो साथ तो रहता है मुझे साथ नही रखता
या तो मुझसे कभी मेरे वो सपने ना चुरता
या मेरी आँखों में लंबी सी रात नही रखता
उसने तो दिल से मेरा ये प्यार भी निकाला
सच कहा था दिल में कोई बात नही रखता
फैला के दामन भी उस से प्यार ना मिलेगा
फकीरों के हाथों मे कभी खैरात नही रखता
हर बार नयी ठोकर उस मासूम को मिली है
अपने साथ गुजिश्ता तज़रबात नही रखता
--अनिल पराशर
तुम्हारा आईना जो बनाना पड़ेगा
तुम्हारा आईना जो बनाना पड़ेगा
चाँद को ही ज़मीन पे लाना पड़ेगा
--अनिल पराशर
चाँद को ही ज़मीन पे लाना पड़ेगा
--अनिल पराशर
Tuesday, May 26, 2009
चाँद को ओढ़ने के इंतज़ाम कीजिए
चाँद को ओढ़ने के इंतज़ाम कीजिए
वसीयत बच्चों के अब नाम कीजिए
बिस्तर बिछा के कब्र राह तक रही
वक़्त आ गया है कि आराम कीजिए
आसमाँ से तमाम रकीब दोस्त एक
आप सभी से दुआ सलाम कीजिए
दुरुस्त था इश्क़ में बीच का सफ़र
ना चर्चा आगाज़ ओ अंजाम कीजिए
खारा पन बढ़े तो मय से ये लगें
किसी तरह अश्क़ भी जाम कीजिए
कुछ नही तो ये टूटी चूड़ियाँ सही
कुछ तो मासूम के भी नाम कीजिए
--अनिल पराशर
वसीयत बच्चों के अब नाम कीजिए
बिस्तर बिछा के कब्र राह तक रही
वक़्त आ गया है कि आराम कीजिए
आसमाँ से तमाम रकीब दोस्त एक
आप सभी से दुआ सलाम कीजिए
दुरुस्त था इश्क़ में बीच का सफ़र
ना चर्चा आगाज़ ओ अंजाम कीजिए
खारा पन बढ़े तो मय से ये लगें
किसी तरह अश्क़ भी जाम कीजिए
कुछ नही तो ये टूटी चूड़ियाँ सही
कुछ तो मासूम के भी नाम कीजिए
--अनिल पराशर
Friday, May 15, 2009
उस को तो मेरी हर ग़ज़ल चाहिए
उस को तो मेरी हर ग़ज़ल चाहिए
जिसका मुझे बस एक पल चाहिए
मैं झूठ से भी गुज़र कर लूं मगर
हू-ब-हू तेरी ही इक नकल चाहिए
प्यार तुझ को भी है मुझसे मगर
मुहब्बत में मेरी बस पहल चाहिए
सारा माज़ी दिया तो क्या दे दिया
तेरे इस आज का एक पल चाहिए
तुम वो ना करो जो वो कर चुका
इश्क़ में तो हमेशा असल चाहिए
मेरी तस्वीरें क्यों उस के सामने
पेशानी पे नया एक बल चाहिए?
मन पहले जैसा तो नही रह गया
जाने क्या इसे आज कल चाहिए
मुश्किलें गडीं जीवन के खेत में
हल नही इनका इन्हे हल चाहिए
मन बहुत मैना हो चुका है मेरा
तेरे आँसू या की गंगा जल चाहिए
इधर की उधर की बहुत हो चुकी
मासूमजी अब इक ग़ज़ल चाहिए
--अनिल पराशर
जिसका मुझे बस एक पल चाहिए
मैं झूठ से भी गुज़र कर लूं मगर
हू-ब-हू तेरी ही इक नकल चाहिए
प्यार तुझ को भी है मुझसे मगर
मुहब्बत में मेरी बस पहल चाहिए
सारा माज़ी दिया तो क्या दे दिया
तेरे इस आज का एक पल चाहिए
तुम वो ना करो जो वो कर चुका
इश्क़ में तो हमेशा असल चाहिए
मेरी तस्वीरें क्यों उस के सामने
पेशानी पे नया एक बल चाहिए?
मन पहले जैसा तो नही रह गया
जाने क्या इसे आज कल चाहिए
मुश्किलें गडीं जीवन के खेत में
हल नही इनका इन्हे हल चाहिए
मन बहुत मैना हो चुका है मेरा
तेरे आँसू या की गंगा जल चाहिए
इधर की उधर की बहुत हो चुकी
मासूमजी अब इक ग़ज़ल चाहिए
--अनिल पराशर
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