रुखसत हुआ तो बात मेरी मान कर गया
जो था उसके पास वो मुझे दान कर गया
बिछड़ा कुछ इस अदा से के रुत ही बदल गयी
एक शख्स सारे शहर को वीरान कर गया
दिलचस्प वाक्य है की कल एक अज़ीज़ दोस्त
अपनी मुफाद पर मुझे कुर्बान कर गया
इतनी सुधर गयी है जुदाई में ज़िन्दगी
हाँ ! वो जफा से तो मुझ पे एहसान कर गया
मैं बात बात पर कहता था जिसको जान
वो शख्स आखिर आज मुझे बेजान कर गया
--खालिद शरीफ
If you know, the author of any of the posts here which is posted as Anonymous.
Please let me know along with the source if possible.
Showing posts with label Khalid Shareef. Show all posts
Showing posts with label Khalid Shareef. Show all posts
Sunday, January 22, 2012
एक शख्स सारे शहर को वीरान कर गया
Wednesday, March 11, 2009
rukhsat huaa to baat merii maan kar gaya
रुखसत हुआ तो बात मेरी मान कर गया
जो उसके पास था वो मुझे दान कर गया
बिछड़ा कुछ इस अदा से के रुत ही बदल गई
इक शक्स सारे शहर को वीरान कर गया
दिलचस्प वाक्या है के कल इक अज़ीज़ दोस्त
अपने मुफात पर मुझे कुरबान कर गया
कितनी सुधर गई है जुदाई में ज़िन्दगी
हा¡ वो ज़फा से मुझपे तो एहसान कर गया
खालिद मैं बात बात पे कहता था जिसको जान
वो शक्स आकारात मुझे बेजान कर गया
-- खालिद शरीफ
जो उसके पास था वो मुझे दान कर गया
बिछड़ा कुछ इस अदा से के रुत ही बदल गई
इक शक्स सारे शहर को वीरान कर गया
दिलचस्प वाक्या है के कल इक अज़ीज़ दोस्त
अपने मुफात पर मुझे कुरबान कर गया
कितनी सुधर गई है जुदाई में ज़िन्दगी
हा¡ वो ज़फा से मुझपे तो एहसान कर गया
खालिद मैं बात बात पे कहता था जिसको जान
वो शक्स आकारात मुझे बेजान कर गया
-- खालिद शरीफ
Subscribe to:
Posts (Atom)