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Tuesday, August 24, 2010

मुझे माँ का आँचल दे दो, मुझे उसी में सुकूं मिलता है

किसी को हाथों के हुनर, किसी को खून में जुनूं मिलता है
मुझे माँ का आँचल दे दो, मुझे उसी में सुकूं मिलता है
--अभिषेक मिश्रा

Wednesday, February 3, 2010

परखता हूँ मैं जब ये बात बुनियादी निकलती है

परखता हूँ मैं जब ये बात बुनियादी निकलती है,
कोई सूरत हो माँ के सामने सादी निकलती है !!

--रीताज मैनी

Sunday, January 10, 2010

मां की चाहत की बदौलत है कहानी तेरी

मां की चाहत की बदौलत है कहानी तेरी
इनकी क़ुरबानियों के सदके है जवानी तेरी
तेरा हर ताज मां के कदमों की धूल है
मां नहीं तो किस काम की हुकमरानी तेरी
--अज्ञात

Sunday, August 23, 2009

लभदे लभदे थक जांगे नहीं मां लभणी

धरती उत्ते स्वर्ग नहीं थां लभणी,
लभदे लभदे थक जांगे नहीं मां लभणी
रिश्ते नाते होर बथेरे दुनिया विच
इस रिश्ते विच ही साडी दुनिया लभणी

मां है रब दा रूप सयाणे कह गये ने
पर उस रब नूं पूजन वाले थोड़े रह गये ने
धुर दरगाहे उसनूं नहीं जे थां लभणी
लभदे लभदे थक जांगे नहीं मां लभणी

जीवन धुप ते मां परछावां हुंदी ए
हर सुख दुख दा ए सिरनावां हुंदी ए
मा दी हिक दी निघ वी किधरे ना लभणी
लभदे लभदे थक जांगे नहीं मां लभणी

कर्ज़ा इस दा ज़िन्दगी भर नहीं ला सकदे
पा लो जिन्ना प्यार एस तो पा सकदे
गलती कर के जिस तो सदा खिमां लभणी
लभदे लभदे थक जांगे नहीं मां लभणी

जद तू अपणे सीने धस लवौंदी सें
मिठियां लोरियां गा के जद सवौंदी सें
माख्यों मिठी किधरे होर ज़ुबां लभणी
लभदे लभदे थक जांगे नहीं मां लभणी

तेरी पक्की जद वी खाण नूँ जी करदा
नस के तेरे कोल औण नूं जी करदा
ना मूंगी, ना मसर, ते ना हो माह लभणी
लभदे लभदे थक जांगे नहीं मां लभणी

भुखी रह के साडा ढिढ जो भरदी रही
सुख लयी साडे नित दुआवां करदी रही
ना कूचे गलियां शहर-गिरां लभणी
लभदे लभदे थक जांगे नहीं मां लभणी

प्यार दा सोमा तू ममता दी मूरत है
छोटे वड्डे सब नूं तेरी ज़रूरत है
बिन तेरे पास पतझड़ अते खिज़ां लभणी
धन दौलत ते मिल जाणी नहीं मां लभणी
लभदे लभदे थक जांगे नहीं मां लभणी

--'नूर' रवि नूर सिंह