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Sunday, April 5, 2009

ग़ालिब न कर हुज़ूर में तू बार बार अर्ज़

ग़ालिब न कर हुज़ूर में तू बार बार अर्ज़
ज़ाहिर है तेरा हाल सब उन पर कहे बगैर
--मिरज़ा ग़ालिब

Saturday, April 4, 2009

रुकवा देना मेरा जनाज़ा ग़ालिब जब उनका घर आये

रुकवा देना मेरा जनाज़ा ग़ालिब जब उनका घर आये
शायद वो झांक ले खिड़की से, और मेरा दिल धड़क जाये
--मिरज़ा ग़ालिब

Sunday, March 29, 2009

ये न थी किसमत कि विसाल-ए-यार होता

ये न थी किसमत कि विसाल-ए-यार होता
अगर और जीते रहते, यही इंतज़ार होता
--मिरज़ा ग़ालिब

रगों में दौड़ते फिरने के हम नहीं क़ायल

रगों में दौड़ते फिरने के हम नहीं क़ायल
जब आँख से ही न टपका तो फ़िर लहू क्या है
--मिरज़ा ग़ालिब

तुम उनके वादे का ज़िक्र उनसे क्यों करो ग़ालिब

तुम उनके वादे का ज़िक्र उनसे क्यों करो ग़ालिब
ये क्या कि तुम कहो, और वो कहें याद नहीं
--मिरज़ा ग़ालिब

तुम मुझे कभी दिल कभी आंखो से पुकारो ग़ालिब

तुम मुझे कभी दिल कभी आंखो से पुकारो ग़ालिब
ये होंठो का तकल्लुफ़ तो ज़माने के लिये है
--मिरज़ा ग़ालिब

Saturday, March 28, 2009

तेरे वादे पर जिये हम तो ये जान झूठ जाना

तेरे वादे पर जिये हम तो ये जान झूठ जाना
के खुशी से मर ना जाते अगर ऐतबार होता
--मिरज़ा ग़ालिब