Tuesday, July 27, 2010

ए काश कहीं ऐसा होता

ए काश कहीं ऐसा होता, के दो दिल होते सीने में
इक टूट भी जाता इश्क़ में तो, तकलीफ़ ना होती जीने में

ए काश कहीं ऐसा होता, के दो दिल होते सीने में

सच कहते है लोग के पीकर, रंग नशा बन जाता है
कोई भी हो, रोग यह दिल का, दर्द दवा बन जाता है

आग लगी हो इस दिल में तो, हर्ज़ है क्या फिर पीने में

ए काश कहीं ऐसा होता, के दो दिल होते सीने में
इक टूट भी जाता इश्क़ में तो, तकलीफ़ ना होती जीने में

ए काश कहीं ऐसा होता, के दो दिल होते सीने में

भूल नहीं सकता यह सदमा, याद हमेशा आएगा
किसी ने ऐसा दर्द दिया तो, बरसो मुझे तड़पाएगा
भर नहीं सकते ज़ख़्म यह दिल के, कोई साल महीने में

ए काश कहीं ऐसा होता, के दो दिल होते सीने में
एक टूट भी जाता इश्क़ में तो, तकलीफ़ ना होती जीने में

ए काश कहीं ऐसा होता, के दो दिल होते सीने में

--अज्ञात

3 comments:

  1. बहुत बहुत अच्छा लिखा हें.

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  2. आभार इस प्रस्तुति का.

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  3. आनंद बख्शी

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