Wednesday, July 21, 2010

बच जाएगी, बस जाएगी, जर्रों मे लेकिन याद कोई

माँगे तो क्या माँगे रब से, हो मन मे बची मुराद कोई,
चंदा को छूने की हसरत, पर अब ना तेरे बाद कोई..

वो बोले थे कह दो कहने से मन हल्का हो जाएगा,
जाती लहरों से उजड़े तट करते भी क्या फरियाद कोई.

हमराहों ने जब हाथ छोड़ थी खुशी-खुशी राहें बदली,
तन्हाई यूँ आकर बोली, मत डर है तेरे साथ कोई.

लोगो की नरम-मिजाजी से.. हम को तो सख़्त शिकायत है,
माना की हैं आबाद नही, इतने भी नही बर्बाद कोई

तन मिट्टी का ढलते ढलते, एक रोज धुआँ बन जाएगा,
बच जाएगी, बस जाएगी, जर्रों मे लेकिन याद कोई

--गौरव शुक्ला

E-mail : Gaurav_shukla06@infosys.com

6 comments:

  1. आप की रचना 23 जुलाई, शुक्रवार के चर्चा मंच के लिए ली जा रही है, कृप्या नीचे दिए लिंक पर आ कर अपने सुझाव देकर हमें प्रोत्साहित करें.
    http://charchamanch.blogspot.com

    आभार

    अनामिका

    ReplyDelete
  2. वो बोले थे कह दो कहने से मन हल्का हो जाएगा,
    जाती लहरों से उजड़े तट करते भी क्या फरियाद कोई.

    waah, kya baat hai !

    ReplyDelete
  3. gaurav ji,
    charchamanch ke maadhyam se aapke yahaan aana hua aur sach kahunga ki aana safal raha!

    aapka bhi swagat hai mere ghar mein...jiska pata hai...

    http://shayarichawla.blogspot.com/

    ReplyDelete
  4. A nice poem .congratulations.
    asha

    ReplyDelete
  5. बहुत सुन्दर...

    कमेंट्स की सेटिंग से वर्ड वेरिफिकेशन हटा लें..टिप्पणीकर्ताओं को आसानी होगी

    ReplyDelete
  6. भावपूर्ण रचना के लिये बधाई !

    ReplyDelete