Sunday, December 27, 2009

जान-ओ-दिल से मैं हारता ही रहूँ

जान-ओ-दिल से मैं हारता ही रहूँ
गर तेरी जीत मेंरी हार में है।
क्या हुआ गर खुशी नहीं बस में
मुसकुराना तो इख़्तियार में है।
–-फरहत शहजाद


इख़्तियार = Choice, Control, Influence, Option, Right

1 comment:

  1. शायर है फरहत शहजाद

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