मेरे टूटे हुए दिल में वो बसा है अब भी
लौट आओ के मेरे दिल में जगह है अब भी
उसको अपनी जफ़ाओ से शिकायत हो न हो
हमें तो अपनी वफाओं से गिला है अब भी
--अज्ञात
http://www.freesms4.com/2010/09/16/mere-toote-hue-dil-me-wo-basa-he-ab-bhi/
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Saturday, June 9, 2012
मेरे टूटे हुए दिल में वो बसा है अब भी
हमने पाया था जिसे बरसो में इबादत कर के
कभी जज्बों कभी ख़्वाबों की तिजारत कर के
दिल ने दुःख दर्द कमाए हैं मोहब्बत कर के
तुम जब आओगे तो महफूज़ मिलेंगे तुमको
हमने दफनाए हैं कुछ ख़्वाब अमानत कर के
इक ज़रा सी भूल हुई और उसे खो बैठे
हमने पाया था जिसे बरसो में इबादत कर के
--अज्ञात
Source : http://www.freesms4.com/2010/09/20/paya-tha-jisay-barson-me-ibadat-kar-k/
रोज खाता हूँ उसको याद न करने की क़सम
रेज़ा-ए-कांच की सूरत मैं बिखर जाता हूँ
मैं उसकी याद में जब हद से गुज़र जाता हूँ
अब गुरेज़ाँ है वो मिलने से जो कहता था कभी
तुमसे मिलते ही मैं कुछ और निखर जाता हूँ
रोज खाता हूँ उसको याद न करने की क़सम
रोज वादों से अपने ही मुकर जाता हूँ
मुझको तमाशा बना दिया है मोहब्बत ने उसकी
लोग कसते हैं ताने मैं जिधर जाता हूँ
हर मोड़ पे खाया है मोहब्बत में धोखा अर्श
अब कोई प्यार से पुकारे तो डर जाता हूँ
--अर्श
Source : http://www.freesms4.com/2010/09/25/main-us-ki-yad-mai-jb-had-se-guzar-jata-hun/
वो मिन्नतों से कहें चुप रहो खुदा के लिए
बड़ा मज़ा हो के महशर में हम करें शिकवा
वो मिन्नतों से कहें चुप रहो खुदा के लिए
[mahshar=The last day]
--अज्ञात
मेरे लिए वो कबीले को छोड़ कर आता
हजूम में था वो खुल कर न रो सका होगा
मगर यकीन है के सब भर न सो सका होगा
वो शक्स जिस को समझने में मुझको उम्र लगी
बिछड के मुझसे किसी का न हो सका होगा
लरजते हाथ, शिकस्त सी डोर आंसू की
वो खुश्क फूल कहाँ तक पिरो सका होगा
बहुत उजाड थे पाताल उसकी आँखों के
वो आंसूं से न दामन भिगो सका होगा
मेरे लिए वो कबीले को छोड़ कर आता
मुझे यकीन है ये उस से न हो सका होगा
--अज्ञात
Source : http://www.freesms4.com/2011/04/02/mujhe-yakeen-hai-yeh-us-se-na-ho-saka-hoga/
गलत फ़हमी में मत रहना
मोहब्बत का असर होगा, गलत फ़हमी में मत रहना
वो बदलेगा चलन अपना, गलत फ़हमी में मत रहना
तसल्ली भी उसे देना, ये मुमकिन है मैं लौट आऊं
मगर ये भी उसे कहना, गलत फ़हमी में मत रहना
तुम्हारा था, तुम्हारा हूं, तुम्हारा ही रहूंगा मैं
मेरे बारे में इस दरजा गलत फ़हमी में मत रहना
मोहब्बत का भरम टूटा है अब छुप छुप के रोते हो
तुम्हें मैंने कहा था ना गलत फ़हमी में मत रहना
बचा लेगा तुझे सेहरा की तपती धूप से तैमूर
किसी की याद का साया, गलत फ़हमी में मत रहना
तैमूर हसन
क्या ये अच्छा है के आदत ही बना ली जाए ?
पेशतर इसके के कोई बात उछाली जाए
शहर से रस्म-ए-मोहब्बत ही निकाली जाए ?
एक दो दिन की जुदाई हो तो खामोश रहूँ
क्या ये अच्छा है के आदत ही बना ली जाए ?
एक दिन अमन का गहवाराह बनाएगी दुनिया
काश दिल से मेरे ये खाम खयाली जाए
[Khaam khayaali=Apprehension, Whim]
अब तो कब्रें भी मेरी जान नहीं हैं महफूज़
ये भी मुमकिन है के मय्यत ही उठा ली जाए
माल असबाब तो क्या बचेगा फरहात
इतना काफी है के इज्ज़त ही बचा ली जाए
[Maal asbaab : Load]
--फरहात अब्बास
Friday, June 8, 2012
महफ़िल लगी थी बद्दुआओं की, हमने भी दिल से कहा
महफ़िल लगी थी बद्दुआओं की, हमने भी दिल से कहा
उसे इश्क हो !! उसे इश्क हो !! उसे इश्क हो !! किसी बेवफा से
--अज्ञात
एक आरज़ू है पूरी परवरदिगार करे
एक आरज़ू है पूरी परवरदिगार करे
मैं देर से जाऊं, वो मेरा इंतज़ार करे
--अज्ञात
Sunday, May 20, 2012
कोई दीवाना कहता है कोई पागल समझता है
कोई दीवाना कहता है कोई पागल समझता है
मगर धरती की बेचैनी को बस बदल समझता है
तू मुझसे दूर कैसी है मैं तुझसे दूर कैसा हूँ
ये तेरा दिल समझता है या मेरा दिल समझता है
प्यार एक एहसासों की पावन सी कहानी है
कभी कबीरा दीवाना था, कभी मीरा दीवानी है
यहाँ सब लोग कहते हैं की मेरे आँखों में आंसू हैं
जो तू समझे तो मोती हैं, जो न समझे तो पानी है
समुन्दर पीर का अन्दर है लेकिन रो नहीं सकता
ये आंसू प्यार का मोती है, मैं इसको खो नहीं सकता
मेरी चाहत को दुल्हन तू बना लेना मगर सुन ले
जो मेरा हो नहीं पाया, वो तेरा हो नहीं सकता
--डा कुमार विश्वास
Sunday, May 13, 2012
दिल की दिल में ना रह जाये ये कहानी कह लो
दिल की दिल में ना रह जाये ये कहानी कह लो
चाहे दो हर्फ़ लिखो चाहे ज़बानी कह लो
मैंने मरने की दुआ माँगी वो पूरी ना हुई
बस इस को मेरे जीने की कहानी कह लो
सर_सर-ए-वक़्त उड़ा ले गई रूदाद-ए-हयात
वही अवराक़ जिन्हें अहद-ए-जवानी कह लो
[sar_sar-e-vaqt = winds of time; rudaad-e-hayaat = tale of life]
[avaraaq = pages; ahad-e-javaanii = youthful period]
तुम से कहने की ना थी बात मगर कह बैठा
अब इसे मेरी तबियत की रवानी कह लो
वही इक क़िस्सा ज़माने को मेरा याद रहा
वही इक बात जिसे आज पुरानी कह लो
हम पे जो गुज़री है बस उस को रक़म करते हैं
आप बीती कहो या मर्सियाख़्वानी कह लो
--अज्ञात
वो जिसका तीर चुपके से जिगर के पार होता है
वो कोई गैर क्या अपना ही रिश्तेदार होता है
किसी से भूल कर भी अपने दिल की बात मत कहना
यहाँ ख़त भी जरा-सी देर में अखबार होता है
--डा कुमार विश्वास
Monday, May 7, 2012
कायम है ज़माने में रिश्वतों के सिलसिले
कायम है ज़माने में रिश्वतों के सिलसिले
तुम भी कुछ ले दे के मुझसे मोहब्बत कर लो
--अज्ञात
Sunday, April 22, 2012
इससे पहले के पुराना पड़ जाये .
मेरे पीछे ये ज़माना पड़ जाये ..
जाने कब शहर से जाना पड़ जाये ..
तू किसी को भी अपना दिल दे दे ..
कही मुझको न चुराना पड़ जाये ..
छुड़ा के पीछा वो ये सोचती है
फिर से पीछे वो दीवाना पड़ जाये ..
आ भी जा के नया है इश्क मेरा ..
इससे पहले के पुराना पड़ जाये .
--सतलज राहत
Sunday, April 15, 2012
तुम आँखों की बरसात बचाए हुए रखना,
तुम आँखों की बरसात बचाए हुए रखना,
कुछ लोग अभी आग लगाना नहीं भूले
ये बात अलग है, हाथ कलम हो गए अपने
हम आपकी तस्वीर बनाना नहीं भूले
--सागर आज़मी
Sunday, April 8, 2012
किसी की चाह न थी दिल में तेरी चाह के बाद
नज़र मिला न सके उससे उस निगाह के बाद
वही है हाल हमारा जो हो गुनाह के बाद
मैं कैसे और किसी सिम्त मोड़ता हूँ खुद को
किसी की चाह न थी दिल में तेरी चाह के बाद
--कृष्ण बिहारी नूर
मैं भी घर पर न रहा वक़्त मुक़र्रर कर के
संग को तकिया बना कर, ख़्वाब को चादर कर के
जिस जगह थकता हूँ, पड़ा रहता हूँ बिस्तर कर के
अब किसी आन्झ का जादू नहीं चलता मुझपर
वो नज़र भूल गयी है, मुझे पत्थर कर के
यार लोगों ने बहुत रंज दिए थे मुझको
जा चुके हैं जो हिसाब बराबर कर के
उसको भी पड़ गया एक और ज़रूरी कोई काम
मैं भी घर पर न रहा वक़्त मुक़र्रर कर के
दिल की ख्वाहिश ही रही, पूछेंगे एक दिन उस से
किस को आबाद किया है मुझे बर्बाद कर के
--अज्ञात
Saturday, April 7, 2012
ये तादाद 'दोस्तों' की .. हमसे संभाली नहीं जाती
कुछ 'दुश्मन' में हो जाए तब्दील .... तो बेहतर है
ये तादाद 'दोस्तों' की .. हमसे संभाली नहीं जाती
--अमित हर्ष
Tuesday, April 3, 2012
इश्क किसी से करते हैं और किसी से निकाह करते हैं
अपनी ज़िंदगी को इश्क में फनाह करते हैं
कुछ लोग आज भी इश्क बेवजाह करते हैं
मुझे चाहने वाले अक्सर रूठ जाते हैं मुझसे
हम सच बोलते हैं यही गुनाह करते हैं
अजीब दौर चला है सुना है कि अब लोग
इश्क किसी से करते हैं और किसी से निकाह करते हैं
--अभिषेक मिश्रा
राह कब तक वो मेरी राजकुमारी देखे
प्यार का नश्शा , मोहब्बत की खुमारी देखे
जो भी देखे यहाँ .. मुझ पर तुझे तारी देखे
बस तेरे आरिज़_ओ_ रुखसार ही आते हैं नज़र
किसको फुर्सत जो यहाँ चोट हमारी देखे
मुझे भी शहर में छोटी सी सल्तनत दे दे
राह कब तक वो मेरी राजकुमारी देखे
--सतलज राहत