Wednesday, October 1, 2014

जहाँ यार याद न आए वो तन्हाई किस काम की,

जहाँ यार याद न आए वो तन्हाई किस काम की,
बिगड़े रिश्ते न बने तो खुदाई किस काम की, 
बेशक अपनी मंज़िल तक जाना  है ,

           पर  जहाँ से अपना दोस्त ना दिखे
               वो ऊंचाई  किस  काम  की!!

--जावेद अख्तर

Saturday, September 27, 2014

आदतें उसकी थी बस मुझे जलाने वाली 

आदतें उसकी थी बस मुझे जलाने वाली
बात की हंस के मगर दिल को दुखाने वाली

आजकल वो मुझे कुछ बदला हुआ लगता है
हो गयीं उसकी निगाहें भी ज़माने वाली

हमने इख्लास का दामन नही छोड़ा अब तक
हाय उसकी तो मोहब्बत है रुलाने वाली

मैने समझा था गुज़र जाएगा मौसम लेकिन
रुत-ए-बरसात भी निकली तो सताने वाली

तुम्हारे वास्ते अब कोई नही है वसी
खुद से बातें ना करो दिल को बहलाने वाली

-अज्ञात

Sunday, August 17, 2014

और अब ये बेकारी फुर्सत नहीं देती

अब तलक गुजारी फुर्सत नहीं देती
ज़िन्दगी ये हमारी फुर्सत नहीं देती

पहले चाकरी ने मसरूफ कर रखा था
और अब ये बेकारी फुर्सत नहीं देती

कभी तो उलझा दिया दाल रोटी ने
कभी फ़िक्र-ए-तरकारी फुर्सत नहीं देती

इश्क का मुलाज़िम हूँ ड्यूटी पे हर दम
हमें छुट्टी सरकारी फुर्सत नहीं देती

दिल्लगी महज़ या कुछ हकीक़त भी
वो बात तुम्हारी फुर्सत नहीं देती

कोई है की रोज़े की रट लगाए है
किसी को इफ्तारी फुर्सत नहीं देती

रस्मन मिजाजपुरसी दस्तूरन दुआ सलाम
ये दुनिया ये दुनियादारी फुर्सत नहीं देती

सुखन आरामतलबी हममाआनी सही
पर हमें शायरी हमारी फुर्सत नहीं देती
(सुखन=कविता, हममाआनी=पर्याय)

गुरूर-ए-ग़ुरबत तो कभी फक्र-ए-फकीरी
'अमित' को ये खुद्दारी फुर्सत नहीं देती

--अमित हर्ष

Monday, August 4, 2014

तेरी तलब में तो रहता है आसमां पे दिमाग

तेरी तलब में रहता है आसमां पे दिमाग
तुझको पा गये होते तो जाने कहाँ होते

--अज्ञात

Sunday, July 20, 2014

यही हालात इब्तदा से रहे

यही हालात इब्तदा से रहे
लोग हमसे ख़फ़ा-ख़फ़ा-से रहे

बेवफ़ा तुम कभी न थे लेकिन
ये भी सच है कि बेवफ़ा-से रहे

इन चिराग़ों में तेल ही कम था
क्यों गिला फिर हमें हवा से रहे

बहस, शतरंज, शेर, मौसीक़ी
तुम नहीं रहे तो ये दिलासे रहे

उसके बंदों को देखकर कहिये
हमको उम्मीद क्या ख़ुदा से रहे

ज़िन्दगी की शराब माँगते हो
हमको देखो कि पी के प्यासे रहे

--जावेद अख्तर

Saturday, July 12, 2014

किसी का ऐतबार क्या करते

किसी का ऐतबार क्या करते
जो भी देखा ख़्वाब में देखा

Tuesday, July 8, 2014

वो शक्स किसी और की किस्मत में लिखा था

दीवान-ए-गज़ल जिसकी मोहब्बत में लिखा था
वो शक्स किसी और की किस्मत में लिखा था

वो शेर कभी उसकी नज़र से नहीं गुज़रा
जो डूब के जज़्बात की शिद्दत में लिखा था

दुनिया में तो ऐसे कोई आसार नही थे
शायद तेरा मिलना भी क़यामत में लिखा था

--अज्ञात

Monday, July 7, 2014

हिज्र लाजिम है तो वस्ल का वादा कैसा

हिज्र लाज़िम है तो वस्ल का वादा कैसा

इश्क तो इश्क है, कम कैसा ज्यादा कैसा

Sunday, June 29, 2014

फिर मेरा जुर्म भी लोगों को बताया होगा

लव्ज़ कितने ही तेरे पैरों से लिपटे होंगे
तूने जब आखिरी ख़त मेरा जलाया होगा

यूँही कुछ सोच लिया होगा बिछड़ने का सबब
फिर मेरा जुर्म भी लोगों को बताया होगा

तूने जब फूल किताबों से निकाले होंगे
देने वाला भी तुझे याद तो आया होगा

तूने किस नाम से बदला है मेरा नाम बता
किसको लिखा तो मेरा नाम मिटाया होगा

खलील उर रहमान 'कमर'

प्यार उसका हज़ार के नोट जैसा

प्यार उसका हज़ार के नोट जैसा
डर लगता है नकली न हो
--अज्ञात

Sunday, June 15, 2014

मतलबी दुनिया के लोग खड़े, हाथों में पत्थर ले के

मतलबी दुनिया के लोग खड़े, हाथों में पत्थर ले के
मैं कहाँ तक भागूं, शीशे का मुक़द्दर ले के

--अज्ञात

गरीबों के महलों के ख़्वाब भी कमाल हैं

गरीबों के महलों के ख़्वाब भी कमाल हैं
महल जिनमें अमीरों को नींद नहीं आती

--अज्ञात

Friday, June 6, 2014

ये बात जो गर होती मेरे इख्तियार में

ये बात जो गर होती मेरे इख्तियार में
सदियाँ गुज़ार देता तेरे इंतज़ार में

--सतलज राहत

Saturday, May 31, 2014

बहुत थे हमारे भी कभी इस दुनिया में अपने

बहुत थे हमारे भी कभी इस दुनिया में अपने
काम पड़ा दो चार से और हम अकेले हो गए

--अज्ञात

यूं न झांको गरीब के दिल में

यूं न झांको गरीब के दिल में
हसरतें बेलिबास रहतीं हैं

--अज्ञात

तोड़ कर दिल मेरा तुम हाल पूछते हो

तोड़ कर दिल मेरा तुम हाल पूछते हो

बड़े नादाँ हो हुआ क्या बवाल पूछते हो

मनमोहन बाराकोटी

Thursday, May 29, 2014

वही रंजिशें रहीं वही हसरतें रहीं

वही रंजिशें रहीं वही हसरतें रहीं
न ही दर्द-ए-दिल में कमी हुई
बड़ी अजीब सी है ज़िन्दगी हमारी
न गुज़र सकी; न ख़त्म हुई

--अज्ञात

ज़ब्त कहता है कि ख़ामोशी में बसर हो जाए

ज़ब्त कहता है कि ख़ामोशी में बसर हो जाए
दर्द की ज़िद है कि दुनिया को खबर हो जाए

--अज्ञात

Sunday, April 27, 2014

बरबादियो का जायजा लेने के वास्ते

बरबादियो का जायजा लेने के वास्ते
वो पूछते हैं हाल मेरा कभी कभी

--अज्ञात

Tuesday, April 22, 2014

मतलब परस्ती या मासूमियत

मतलब परस्ती या मासूमियत
खुदा जाने !!!!
हमने कहा मोहब्बत है
कहने लगे .... क्या मतलब ??

--अज्ञात