Monday, July 7, 2014

हिज्र लाजिम है तो वस्ल का वादा कैसा

हिज्र लाज़िम है तो वस्ल का वादा कैसा

इश्क तो इश्क है, कम कैसा ज्यादा कैसा

1 comment:

  1. "अश्क़ तो आएँगे ही इश्क़ के दर्द से ,
    जान के इंतज़ार में जँ का गुज़ारा कैसा

    तुम्ही थे साथी जो रूठ गए मुझसे
    तो मुझ पे ये इलज़ाम तेरा लगाना कैसा"

    -मेहबूब

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