Saturday, April 12, 2014

जिस नगर भी जाओ, किस्से हैं कमबख्त दिल के

जिस नगर भी जाओ, किस्से हैं कमबख्त दिल के

कोई ले के रो रहा है, कोई दे के रो रहा है

--अज्ञात

खुदा करे इश्क में ऐसा मकाम आये

खुदा करे इश्क में ऐसा मकाम आये
तुझे भूलने की दुआ करूँ, और दुआ में तेरा नाम आये

--अज्ञात

Friday, April 11, 2014

किसी भी गम के सहारे नहीं गुज़रती है

किसी भी गम के सहारे नहीं गुज़रती है
ये ज़िन्दगी तो गुज़ारे नहीं गुज़रती है

मैं ज़िन्दगी तो कहीं भी गुज़ार सकता हूँ
मगर बगैर तुम्हारे नहीं गुज़रती है

--अज्ञात

Tuesday, April 8, 2014

सुकून और इश्क, वो भी एक साथ

सुकून और इश्क, वो भी एक साथ
रहने दो, कोई अक्ल की बात करो

--अज्ञात

Saturday, April 5, 2014

अंधेरों को तो ये भी खल रहा है

अंधेरों को तो ये भी खल रहा है
दिया मेरा हवा में जल रहा है

तुम्हारे काम इतने तो नहीं हैं
तुम्हारा नाम जितना चल रहा है

--अज्ञात

बहती हुई आँखों की रवानी में मरे हैं

बहती हुई आँखों की रवानी में मरे हैं
कुछ ख्वाब मेरे ऐन जवानी में मरे हैं

क़ब्रों में नहीं हमको किताबों में उतारो
हम लोग मोहब्बत की कहानी में मरे हैं

--अज्ञात

Sunday, March 23, 2014

अफवाह थी कि मुझे इश्क हुआ है

अफवाह थी कि मुझे इश्क हुआ है

लोगों ने पूछ पूछ कर आशिक बना दिया

--अज्ञात

तुम किसी और की

तुम किसी और की हो जाओ जानां

अमीर होने में मुझे अभी वक़्त लगेगा

--अज्ञात

Friday, March 21, 2014

तनहा तनहा मत सोचा कर..

तनहा तनहा मत सोचा कर..
मर जायेगा मर जायेगा.. मत सोचा कर..

प्यार घड़ी भर का ही बहुत है..
झूठा.. सच्चा.. मत सोचा कर...

जिसकी फ़ितरत ही डंसना हो..
वो तो डसेगा मत सोचा कर..

धूप में तनहा कर जाता
क्यूँ यह साया मत सोचा कर..

अपना आप गवाँ कर तूने,
पाया है क्या मत सोचा कर

राह कठिन और धूप कड़ी है
कौन आयेगा मत सोचा कर..

ख्वाब, हकीकत या अफसाना
क्या है दुनिया मत सोचा कर

मूँद ले आँखें और चले चल....
मंज़िल रास्ता.. मत सोचा कर

दुनिया के गम साथ हैं..तेरे
खुद को तनहा, मत सोचा कर

जीना, दूभर हो जायेगा
जानां, इतना मत सोचा कर

मान मेरे शहजाद वगरना
पछताएगा मत सोचा कर...


-फरहत शहजाद

Wednesday, March 5, 2014

कुछ रिश्ते ता उम्र अगर बेनाम रहे तो अच्छा है

कुछ रिश्ते ता उम्र अगर बेनाम रहे तो अच्छा है
आँखों आँखों में ही कुछ पैगाम रहे तो अच्छा है

सुना है मंज़िल मिलते ही उसकी चाहत मर जाती है
गर ये सच है तो फिर हम नाकाम रहें तो अच्छा है

जब मेरा हमदम ही मेरे दिल को न पहचान सका
फिर ऐसी दुनिया में हम गुमनाम रहे तो अच्छा है

--अज्ञात
(From हमनशीं album of shreya ghoshal)

Sunday, March 2, 2014

मैं जिसके पाँव से काँटा निकाल देता हूँ

कुछ इस तरह से वफ़ा की मिसाल देता हूँ
सवाल करता है कोई तो टाल देता हूँ

उसी से खाता हूँ अक्सर फरेब मंजिल का
मैं जिसके पाँव से काँटा निकाल देता हूँ

तसव्वुरात की दुनिया भी खूब दुनिया है
मैं उसके ज़हन को अपने ख्याल देता हूँ

वो कायनात की वुसअत बयान करता है
मैं एक शेर ग़ज़ल का उछाल देता हूँ

कहीं अज़ाब न बन जाये जिंदगी 'मंसूर'
उसे मैं रोज़ एक उलझन में डाल देता हूँ

--मंसूर उस्मानी

Wednesday, February 26, 2014

कुज सानू मरण दा शौक वी सी

कुज उंज वी राहवां औखियाँ सन
कुज गल्ल विच गम दा तौख वी सी

कुज शहर दे लोक वी ज़ालिम सन
कुज सानू मरण दा शौक वी सी

अज़ीम मुनीर नियाज़ी

कौन कहता है एक तरफ़ा प्यार सच्चा नहीं होता

रिश्तों का धागा इतना कच्चा नहीं होता
किसी का दिल तोडना अच्छा नहीं होता
प्यार तो दिल की आवाज़ है
कौन कहता है एक तरफ़ा प्यार सच्चा नहीं होता

--अज्ञात

Monday, February 17, 2014

ज़िन्दगी इस आस में कट गयी

ज़िंदगी इस आस में कट गयी
काश मैं और तुम होते

--अज्ञात

Saturday, February 15, 2014

ये आईने तुझे तेरी खबर क्या देंगे

ये आइने तुझे तेरी खबर क्या देंगे
आ मेरी आँखों में देख ले तू कितना हसीन है

--अज्ञात

Sunday, February 9, 2014

यूं तो हर ग़ज़ल तेरी बात से निकलती है

खलल, ख्यालात .. हालात से निकलती है
यूं तो हर ग़ज़ल तेरी बात से निकलती है

वही तो है जो ढल जाती है अश’आरों में
आवाज़ जो दिल-ओ-जज़्बात से निकलती है

बड़ी दिलकश है वो जो ख़्वाबों की कहानियां
वो दास्ताँ इन्हीं शाम-ओ-रात से निकलती है

बन के दरिया समन्दर में तब्दील हो गई
नदी वो सकरे जल-प्रपात से निकलती हैं

आप तलाश रहे है .. अंजाम के मुहाने पे
वजह हर वजह की शुरुआत से निकलती है

सुनो, समझो, संभालो रखो मर्ज़ी तुम्हारी
बात अब ‘अमित’ के हाथ से निकलती है

--अमित हर्ष

Thursday, February 6, 2014

कोई हल है न कोई जवाब है

कोई हल है न कोई जवाब है
ये सवाल कैसा सवाल है
जिसे भूल जाने का हुक्म है
उसे भूल जाना मुहाल है

--अज्ञात

Tuesday, February 4, 2014

कितना आसान था तेरे हिजर में मरना जानां

कितना आसान था तेरे हिजर में मरना जानां
फिर भी इक उमर लगी जान से जाते जाते
--अज्ञात
(From Noorjahan gazal.. itne marassim the ke aate jaate)

Wednesday, January 29, 2014

एक दिल है के रहता है तरफदार उसी का

जाते थे मेरे हक़ में सब ही फैसले मगर
मुनसिफ ने भी हर बार दिया साथ उसी का

एक वो है के यूँ तोड़ दिए रिश्ते सभी हमसे
एक दिल है के रहता है तरफदार उसी का

--अज्ञात

Sunday, January 26, 2014

ठहरी ठहरी सी तबियत में रवानी आई

ठहरी ठहरी सी तबियत में रवानी आई
आज फिर याद मोहब्बत की कहानी आई

आज फिर नींद को आँखों से बिछडते देखा
आज फिर याद कोई चोट पुरानी आई

मुद्दतों बाद चला उन पर हमारा जादू
मुदत्तो बाद हमें बात बनानी आई

मुद्दतो बाद पशेमा हुआ दरिया हमसे
मुद्दतों बाद हमें प्यास छुपानी आई

मुद्दतों बाद मयस्सर हुआ माँ का आँचल
मुद्दतों बाद हमें नींद सुहानी आई

इतनी आसानी से मिलती नहीं फन की दौलत
ढल गयी उम्र तो गजलो पे जवानी आई

--इकबाल अशर