चलने को रास्ता नहीं होता
तब भी कुछ बुरा नहीं होता
सिर्फ तुमको भूल नहीं पाए
करने से वर्ना क्या नहीं होता
अपना गम पुराना नहीं होता
भले ही कभी नया नहीं होता
मेरी शायरी सब झूठी है
किस्सा सच्चा बयां नहीं होता
जो तूने हाँ कर दी होती
मेरा तब भी भला नहीं होता
सोचता हूँ रस्सी कहाँ होती
अगर मेरा गला नहीं होता
यार उनका क्या होता है ?
जिनका कभी बुरा नहीं होता
सुना है दिल ऐसा होता है
जिसमे कुछ खुरदुरा नहीं होता
दुनिया शायद और बुरी होती
जो तेरा गम जुडा नहीं होता
पर फिर मेरा क्या होता
अगर रास्ता मुडा नहीं होता
अब मुझे अच्छा नहीं लगता
जब मेरे साथ बुरा नहीं होता
तुझमे मुझमे फर्क नहीं होता
जो बाप का पैसा नहीं होता
होने को तो सब हो सकता था
पर तब क्या ऐसा नहीं होता ?
सब तेरे जैसे होते हैं
पर कोई तेरे जैसा नहीं होता
"मानस" ये तो हद है तेरी
चाँद कहने से तेरा नहीं होता
मानस भारद्वाज
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Tuesday, December 4, 2012
सिर्फ तुमको भूल नहीं पाए
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